Janmashtami: टूट गईं बेड़ियां, खुल गए कारागार के ताले; श्रीकृष्ण जन्म के समय हुए 5 चमत्कार

Janmashtami 2026 Krishna Birth 5 Miracles: जन्माष्टमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. इस पावन अवसर पर हम आपको कृष्ण जन्म के समय हुए 5 अलौकिक चमत्कारों के बारे में बताने जा रहे हैं. कैसे टूटीं बेड़ियां और खुले कारागार के ताले, जानिए.

Janmashtami 2026 Krishna Birth 5 Miracles: जन्माष्टमी का पर्व देश-दुनिया में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है. गलियों से लेकर चौक-चौराहे तक हर ओर श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर तैयारियां की जा रही हैं. जन्माष्टमी पर्व पर श्रीकृष्ण के अधिकांश भक्तों के मन में यह सवाल उभर रहा होगा कि आखिर श्रीकृष्ण के जन्म के समय कौन-कौन से चमत्कार हुए? आइए, इस स्टोरी में जानते हैं.

खुल गए ताले... टूट गई बेड़ियां

भाद्रपद यानी भादो कृष्ण अष्टमी को जन्म से पहले तक कान्हा जी के माता-पिता (देवकी और वसुदेव) को कंस ने का अपने गारागार में बंद कर रखा था. भागवत महापुराण के अनुसार, जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तो कारागार के ताले अपने आप खुल गए. इस चमत्कार के बाद वसुदेव ने कान्हा जी को गोकुल पहुंचाया. पौराणिक कथा के अनुसार जैसे ही वसुदेव कान्हा जी को लेकर कारागार के दरवाजे की ओर बढ़े, तो उसमें लगे ताले अपने आप खुल गए. इसके अलावा देवकी और वसुदेव के पैरों में लगी बेड़ियां अपने आप टूट गईं.

आश्चर्यजनक कम हुआ यमुना का जलस्तर

जब कान्हा जी के पिता (वसुदेव) उन्हें टोकरी में रखकर सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए यमुना पार करने लगे, तो उस दौरान मूसलाधार बारिश हो रही थी. इसकी वजह से यमुना नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया था. भागवत महापुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार जब यमुना नदी में कान्हा के पैर पड़े, तो उसका जलस्तर अपने आप कम हो गया. इसके परिणामस्वरूप वसुदेव जी आसानी से कान्हा को नन्दगांव सुरक्षित स्थान पर पहुंचा सके.

गहरी नींद में सो गए पहरेदार

पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, कंस ने देवकी और वसुदेव को गहन सुरक्षा में रखा था. उन लोगों को जहां रखा गया था, उसके आसपास प्रहरी मौजूद थे, जो जागते हुए सुरक्षा कर रहे थे लेकिन जैसे ही श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, पहरेदार गहरी नींद में सो गए. पहरेदारों की नींद तब खुली जब कान्हा के माता-पिता वहां से बाहर निकल गए.

यमुना नदी में अचानक प्रकट हुआ शेषनाग

जब कान्हा के पिता वसुदेव जी उन्हें टोकरी में रखकर यमुना नदी पार कर रहे थे, तो उस दौरान बहुत तेज बारिश हो रही थी. कान्हा जी को कठोर बूंदों से सुरक्षित करने के लिए शेषनाग ने फन फैलाया जिससे कान्हा जी बारिश की बूंदों से सुरक्षित रहे. शास्त्रों में शेषनाग को भगवान विष्णु का सेवक बताया गया है. ऐसे में श्रीकृ्ष्ण के जन्म के समय शेषनाग का अचानक प्रकट होना किसी चमत्कार से कम नहीं है.

योगमाया ने दी कंस को चेतावनी

जब वसुदेव ने कृष्ण को गोकुल स्थित नंद बाबा के घर ले गए, तो वहां पर यशोदा की कोख से सुंदर कन्या का जन्म हुआ. पौराणिक कथाओं के अनुसार, वसुदेव कान्हा जी को वहां रखकर कन्या 'योगमाया' को मथुरा लेकर आ गए. इस घटना के बाद जब कंस को देवकी के 8वीं संतान की जानकारी मिली, तो वह कारागार पहुंचकर योगमाया (कन्या) को उठाकर उसे मारने की कोशिश करने लगा. आश्चर्य की बात है कि वह कन्या कंस के हाथों से छूटकर दिव्य रूप में आसमान में प्रकट हुई. इसके बाद योगमाया रूपी कन्या ने चेतावनी देते हुए कंस के कहा-"जिसे वह मारना चाहता है, उसका जन्म हो चुका है और सुरक्षित है."

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लेखक के बारे में

By दीपेश कुमार ठाकुर

दिपेश कुमार ठाकुर प्रभात खबर डिजिटल में धर्म और राशिफल सेक्शन लीड के तौर पर बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे अनुभव के दौरान उन्होंने धर्म-अध्यात्म, ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और न्यूमेरोलॉजी से जुड़े विषयों पर व्यापक लेखन किया है. उन्होंने Zee News, News24, Bharat Express, NDTV, Jansatta और Hari Bhoomi जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है. धर्म और ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल, तथ्यपरक और पाठकों की रुचि के अनुरूप प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है. उन्होंने संस्कृत साहित्य से स्नातक के साथ जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन में मास्टर्स डिग्री हासिल की है.

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