Janmashtami 2026: भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की जाती है. भक्त व्रत रखते हैं, मंदिरों और घरों को सजाते हैं और आधी रात को कान्हा के जन्म का उत्सव मनाते हैं. यदि आप भी इस बार जन्माष्टमी पर बाल गोपाल का स्वागत करने की तैयारी कर रहे हैं, तो पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की पूरी लिस्ट तुरंत नोट कर लें.
जन्माष्टमी पूजा सामग्री
1. लड्डू गोपाल के अभिषेक और श्रृंगार के लिए:
- भगवान कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर
- झूला या सिंहासन
- पंचामृत बनाने के लिए कच्चा दूध, दही, देसी घी, शहद और गंगाजल
- पीले वस्त्र और मुकुट
- मोरपंख, बांसुरी, वैजयंती माला, कड़े और कुंडल
- चंदन, अक्षत, रोली और अष्टगंध
2. पूजन एवं आरती सामग्री:
- लकड़ी की चौकी और उस पर बिछाने के लिए लाल या पीला कपड़ा
- दीपक, घी, धूपबत्ती, कपूर और माचिस
- जल के लिए कलश
- ताजे फूल और तुलसी दल
- शंख (अभिषेक और आरती के समय बजाने के लिए)
3. भोग और प्रसाद सामग्री:
- माखन और मिश्री
- धनिया पंजीरी और खीर
- पंचमेवा (काजू, बादाम, किशमिश, मखाना और छुआरा)
- मौसम के अनुसार फल
जन्माष्टमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
अष्टमी तिथि का आरंभ: 3-4 सितंबर 2026 की मध्यरात्रि 1:33 बजे होगा.
अष्टमी तिथि की समाप्ति: 4 सितंबर 2026 को रात 11:13 बजे होगी.
चंद्रोदय का समय: 4 सितंबर 2026 को रात 11:09 बजे होगा.
निशिता काल (मध्यरात्रि) पूजा मुहूर्त: रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा. पूजा की कुल अवधि 45 मिनट होगी.
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जन्माष्टमी पूजा विधि
- जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें.
- दिनभर भजन-कीर्तन करें और घर के मंदिर को फूलों से सजाएं.
- रात में निशिता काल के मुहूर्त में लड्डू गोपाल को खीरे से निकालकर उनके जन्म का सांकेतिक उत्सव मनाएं.
- पंचामृत से बाल गोपाल का अभिषेक करें और फिर स्वच्छ जल से स्नान कराएं.
- इसके बाद उन्हें पीले वस्त्र और आभूषण पहनाएं.
- भगवान श्रीकृष्ण को सिंहासन या झूले पर स्थापित करें.
- चंदन का तिलक लगाएं, तुलसी दल चढ़ाएं और माखन-मिश्री व पंजीरी का भोग लगाएं.
- धूप-दीप जलाकर भगवान के सामने रखें.
- चालीसा और व्रत कथा का पाठ करें.
- भगवान श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करें.
- इसके बाद दीपक जलाकर भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें.
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