Raksha Bandhan: रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व है. इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं. राखी बांधने से पहले भाई के माथे पर तिलक लगाने की भी परंपरा है. ऐसे में आइए जानते हैं रक्षाबंधन पर भाई को तिलक लगाने की सही विधि और इसका धार्मिक महत्व.
तिलक लगाने की विधि
दिशा का ध्यान रखें
भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाएं. बहन का मुख पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन दिशाओं को शुभ माना जाता है.
सिर पर रुमाल रखें
तिलक लगाते समय भाई के सिर पर कोई कपड़ा या रुमाल रखना शुभ माना जाता है. इसलिए तिलक लगाने से पहले भाई के सिर पर रुमाल या साफ कपड़ा रख दें.
अनामिका उंगली से तिलक लगाएं
बहन अपने दाहिने हाथ की अनामिका यानी रिंग फिंगर से भाई के माथे पर रोली या चंदन का तिलक लगाएं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, अनामिका उंगली का संबंध सूर्य से माना जाता है. इससे तेज, यश और सम्मान की कामना की जाती है.
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अक्षत लगाएं
रोली या चंदन का तिलक लगाने के बाद उस पर साबुत अक्षत यानी चावल के दाने लगाएं. ध्यान रखें कि अक्षत टूटे या खंडित न हों.
आरती उतारें और रक्षासूत्र बांधें
तिलक और अक्षत लगाने के बाद भाई की आरती उतारें. इसके बाद उसकी दाहिनी कलाई पर राखी या रक्षासूत्र बांधें और मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराएं.
तिलक का धार्मिक महत्व
तिलक को हिंदू धर्म में शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है. रक्षाबंधन पर बहन जब भाई के माथे पर तिलक लगाती है, तो वह उसके सुख, समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना करती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, तिलक भाई के जीवन में सकारात्मकता और शुभता का प्रतीक माना जाता है.
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