Ganesh Chauth 2026: गणेश चौठ भाद्रपद यानी भादो मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. भविष्य पुराण के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था. इसलिए इस दिन गणपति की पूजा-अर्चना की जाती है. शास्त्रों के अनुसार, गणेश चौठ पर शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश का पूजन करने से विघ्न (बाधा) दूर होता है. साथ ही, गणपति जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है. गणेश चौठ की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त और विधि क्या है, जानिए.
गणेश चौठ 2026 शुभ मुहूर्त और महत्व
भविष्य पुराण के अनुसार भाद्रपद (भादो) मास की चतुर्थी के दिन मध्याह्न काल में भगवान गणेश का जन्म हुआ था. इसलिए उनकी पूजा के लिए मध्याह्न काल का समय सबसे अच्छा माना गया है. इस दौरान उनकी पूजा करने से मनोकामना पूरी होने की मान्यता है.
मिथिला और काशी के पंचांग के मुताबिक, इस साल गणेश चौठ 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा. इस दिन मध्याह्न पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 30 मिनट से दोपहर 12 बजकर 58 मिनट तक है. गणपति की पूजा के लिए 2 घंटे 28 मिनट का समय मिलेगा.
चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 6 मिनट से शुरू होगी जबकि इसकी समाप्ति 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर होगी. इस दिन चंद्रमा के उदित होने का समय शाम 7 बजकर 36 मिनट है. चंद्रोदय के बाद 'चौठ चंद्र' पूजन का समय शाम 7 बजकर 36 मिनट से शुरू है.
| मुहूर्त विवरण | तारीख और समय | |
| गणेश चौठ 2026 | 14 सितंबर 2026, सोमवार | |
| चतुर्थी तिथि प्रारंभ | 14 सितंबर, सुबह 7:06 बजे | |
| चतुर्थी तिथि समाप्त | 15 सितंबर, सुबह 7:44 बजे | |
| गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त | 14 सितंबर, सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक | |
| पूजा की कुल अवधि | 2 घंटे 28 मिनट | |
| चंद्रोदय का समय | 14 सितंबर, शाम 7:36 बजे | |
| चौठ चंद्र पूजन प्रारंभ | शाम 7:36 बजे से |
ये भी पढ़ें: Ganesh Chaturthi Special: कार्तिकेय ने लगाई पृथ्वी की दौड़, गणेश जी ने माता-पिता की परिक्रमा से जीत ली बाजी
गणेश चौठ 2026 पूजा विधि
- भाद्रपद यानी भादो शुक्ल चतुर्थी को सुबह नहाने के बाद शुद्ध आसन पर पूरब की तरफ मुंह करके बैठ जाएं.
- भगवान गणेश के लिए एक छोटी चौकी स्थापित करें.
- चौकी को गंगाजल से शुद्ध कर उसकी पूजा करें फिर उस पर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें.
- शास्त्रों के अनुसार, मूर्ति सोने, चांदी, तांबे, पीतल, मिट्टी या गाय के गोबर से बना होना चाहिए.
- पूजन से पहले संकल्प लें और इसके बाद कलश स्थापित करें.
- कलश की स्थापना करने के बाद नवग्रह, दशदिग्पाल (दसों दिशाओं के देवता) का पूजन करें.
- दशदिग्पाल की पूजा के बाद भगवान गणेश का शोडषोपचार, दशोपचार या पंचोपचार जो बन सके, पूजा करें.
- गणेश जी का ध्यान "ॐ एकदन्तं शूर्पकर्णं गजवक्त्रं चतुर्भुजम्, पाशांकुशधरं देवं ध्यायेत् सिद्धिविनायकम्" इस मंत्र के करें.
- संभव हो, गणपति जी का ध्यान करने के बाद दूर्वा (घास) की 21 गांठ अर्पित करें. अगर ऐसा संभव न हो सके, तो कम से कम एक दूर्वा जरूर अर्पित करें.
- दूर्वा के साथ-साथ गणेश जी को शमी का पत्ता भी चढ़ाएं. इसके बाद घी से बना हुआ मोदक अर्पित करें. इसके अलावा गुड़ और घी से बना कोई दूसरा पकवान भी चढ़ा सकते हैं.
- भोग में गणपति बप्पा को मौसम के अनुकूल फल जैसे- केला, सेब, जामुन और नारियल भी चढ़ाएं, क्योंकि ये चीजें भी उनको प्रिय हैं.
- भगवान गणेश को सिंदूर, अबीर, सुगंधित फूल अर्पित करने के साथ-साथ उन्हें धूप-दीप दिखाएं. इतना करने के बाद अरती करें और तीन बार उनकी परिक्रमा करें.
ये भी पढ़ें: Ganesh Chaturthi Special: गणेश जी की भूख के आगे कम पड़ गया कुबेर का खजाना, ऐसे टूटा धन के देवता का घमंड
