Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ माह का पांचवां बड़ा मंगल आज 2 जून 2026 को मनाया जा रहा है. उत्तर भारत में इसे बुढ़वा मंगल के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगलवार का विशेष महत्व होता है, लेकिन बड़ा मंगल को भगवान हनुमान की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना गया है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा का कई गुना फल प्राप्त होता है. कहा जाता है कि इसी पावन अवसर पर भगवान हनुमान को अमरत्व का वरदान प्राप्त हुआ था, इसलिए भक्त इस दिन विशेष रूप से उनकी आराधना करते हैं.
बजरंग बाण के पाठ से मिलेगा लाभ
बड़ा मंगल के दिन हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है. विशेष रूप से बजरंग बाण का पाठ नकारात्मक शक्तियों, भय, मानसिक तनाव और जीवन की बाधाओं को दूर करने वाला माना गया है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सच्चे मन से बजरंग बाण का पाठ करने पर हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति को साहस, आत्मविश्वास तथा सकारात्मक ऊर्जा मिलती है.
हनुमान जी को अर्पित करें प्रिय भोग
बड़ा मंगल के दिन भगवान हनुमान को उनकी प्रिय वस्तुएं अर्पित करने का विशेष महत्व है. इस दिन चमेली का तेल, सिंदूर, लाल फूल, गुड़-चना, बूंदी के लड्डू और पान का भोग चढ़ाया जाता है. मान्यता है कि इन वस्तुओं को अर्पित करने से बजरंगबली प्रसन्न होते हैं और भक्तों के जीवन से संकट दूर करते हैं. साथ ही बंदरों को गुड़ और चना खिलाना भी पुण्यदायी माना जाता है.
कष्टों से राहत के लिए करें ये उपाय
यदि जीवन में लगातार बाधाएं आ रही हैं या मानसिक अशांति बनी हुई है, तो बड़ा मंगल के दिन हनुमान मंदिर जाकर दीपक जलाएं और बजरंग बाण का पाठ करें. जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्य सामग्री का दान करने से भी विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. ऐसा करने से भगवान हनुमान की कृपा बनी रहती है और जीवन में सुख, शांति तथा सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है.
श्री बजरंग बाण
दोहा
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान.
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥
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चौपाई
जय हनुमंत संत हितकारी. सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
जन के काज बिलंब न कीजै. आतुर दौरि महा सुख दीजै॥
जैसे कूदि सिंधु महिपारा. सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥
आगे जाय लंकिनी रोका. मारेहु लात गई सुरलोका॥
जाय बिभीषन को सुख दीन्हा. सीता निरखि परमपद लीन्हा॥
बाग उजारि सिंधु महँ बोरा. अति आतुर जमकातर तोरा॥
अक्षय कुमार मारि संहारा. लूम लपेटि लंक को जारा॥
लाह समान लंक जरि गई. जय जय धुनि सुरपुर नभ भई॥
अब बिलंब केहि कारन स्वामी. कृपा करहु उर अंतरयामी॥
जय जय लखन प्रान के दाता. आतुर ह्वै दुख करहु निपाता॥
जै हनुमान जयति बल-सागर. सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥
ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले. बैरिहि मारु बज्र की कीले॥
ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा. ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा॥
जय अंजनि कुमार बलवंता. शंकरसुवन बीर हनुमंता॥
बदन कराल काल-कुल-घालक. राम सहाय सदा प्रतिपालक॥
भूत, प्रेत, पिसाच निसाचर. अगिन बेताल काल मारी मर॥
इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की. राखु नाथ मरजाद नाम की॥
सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै. राम दूत धरु मारु धाइ कै॥
जय जय जय हनुमंत अगाधा. दुख पावत जन केहि अपराधा॥
पूजा जप तप नेम अचारा. नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥
बन उपबन मग गिरि गृह माहीं. तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं॥
जनकसुता हरि दास कहावौ. ताकी सपथ बिलंब न लावौ॥
जै जै जै धुनि होत अकासा. सुमिरत होय दुसह दुख नासा॥
चरन पकरि, कर जोरि मनावौं. यहि औसर अब केहि गोहरावौं॥
उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई. पायँ परौं, कर जोरि मनाई॥
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता. ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥
ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल. ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल॥
अपने जन को तुरत उबारौ. सुमिरत होय आनंद हमारौ॥
यह बजरंग-बाण जेहि मारै. ताहि कहौ फिरि कवन उबारै॥
पाठ करै बजरंग-बाण की. हनुमत रक्षा करै प्रान की॥
यह बजरंग बाण जो जापैं. तासों भूत-प्रेत सब कापैं॥
धूप देय जो जपै हमेसा. ताके तन नहिं रहै कलेसा॥
