Devshayani Ekadashi 2026: आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है. इस पावन व्रत को आषाढ़ी एकादशी और हरिशयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में चार महीनों के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास का आरंभ हो जाता है. चातुर्मास के दौरान विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि सभी मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं. यदि आप भी इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए व्रत और पूजन करने जा रहे हैं, तो पूजा सामग्री की सूची पहले से तैयार कर लें, ताकि अंतिम समय में कोई आवश्यक वस्तु छूट न जाए.
देवशयनी एकादशी पूजा सामग्री लिस्ट
- भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर
- पूजा की चौकी
- चौकी पर बिछाने के लिए पीला कपड़ा
- भगवान के लिए पीले वस्त्र
- तांबे या पीतल का लोटा अथवा कलश
- शुद्ध जल
- गंगाजल
- रोली
- कुमकुम
- अक्षत
- हल्दी
- पीला चंदन
- तुलसी दल
- फूल
- फल
- शुद्ध देसी घी
- दीपक
- रुई की बत्ती
- धूपबत्ती
- कपूर
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर)
- मिठाई
- पान
- सुपारी
- देवशयनी एकादशी व्रत कथा की पुस्तक
- भगवान को सांकेतिक रूप से शयन कराने के लिए छोटा बिस्तर, गद्दा, तकिया या पीला वस्त्र
देवशयनी एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
| पूजा | समय एवं तिथि |
| एकादशी तिथि प्रारंभ | 24 जुलाई 2026, सुबह 09:12 बजे से |
| एकादशी तिथि समाप्त | 25 जुलाई 2026, सुबह 11:34 बजे तक |
| व्रत की तिथि | शनिवार, 25 जुलाई 2026 |
| पारण का समय | 26 जुलाई 2026 (रविवार), सुबह 05:39 बजे से 08:22 बजे तक |
देवशयनी एकादशी पूजा विधि
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
- हाथ में जल और अक्षत लेकर भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें.
- पूजा स्थान पर चौकी रखकर उस पर पीला कपड़ा बिछाएं.
- चौकी पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें.
- भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराएं (यदि संभव हो), फिर पीला चंदन, रोली, पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करें.
- इसके बाद भगवान को फल और मिठाई का भोग लगाएं.
- भगवान के समक्ष धूप, अगरबत्ती और शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं.
- भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें.
- श्री विष्णु चालीसा तथा देवशयनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें.
- अंत में घी के दीपक या कपूर से भगवान की आरती करें.
- रात्रि में भगवान विष्णु से प्रार्थना करते हुए उन्हें सांकेतिक रूप से शयन कराएं.
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