सलिल पाण्डेय, मिर्जापुर
Chaitra Navratri 2026: साल 2026 में चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू होगी और 27 मार्च, राम नवमी के दिन समाप्त होगी. इन 9 दिनों में हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रूप की पूजा की जाती है. सनातन संस्कृति में प्रत्येक पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला संदेश भी समाहित करता है. वसंतिक नवरात्र भी ऐसा ही पावन अवसर है, जो मानव को सत्य, संयम और शक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है. इस दौरान मां दुर्गा की आराधना कर उनसे आंतरिक शक्ति प्राप्त करने की कामना की जाती है.
नकारात्मकता पर विजय का प्रतीक
नवरात्र के नौ दिनों में माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है. “या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता…” की प्रार्थना हमें यह स्मरण कराती है कि शक्ति हर जीव में विद्यमान है. मानव जीवन में नकारात्मक शक्तियाँ, जैसे क्रोध, मोह, लोभ और नशा, अक्सर प्रभाव डालती हैं. इनसे मुक्ति पाने के लिए पूजा-पाठ, व्रत-उपवास और धर्मग्रंथों का अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है.
दुर्गासप्तशती का गूढ़ संदेश
नवरात्र में श्रीदुर्गासप्तशती और रामचरितमानस का पाठ विशेष महत्व रखता है. दुर्गासप्तशती में ‘मधु’ और ‘कैटभ’ राक्षसों का वध, प्रतीकात्मक रूप से नशा और नकारात्मकता पर विजय को दर्शाता है. यह संदेश देता है कि जब जीवन में बुराइयाँ हावी होने लगें, तब ईश्वरीय शक्ति की शरण ही सर्वोत्तम मार्ग है.
सुरथ और समाधि की कथा का अर्थ
ग्रंथों में वर्णित राजा सुरथ और वैश्य समाधि की कथा भी गहरा जीवन संदेश देती है. जब बाहरी परिस्थितियाँ विपरीत हो जाएँ या अपने ही साथ छोड़ दें, तब व्यक्ति को ‘मेधा’ यानी विवेक और सुचिंतन का सहारा लेना चाहिए. ऋषि मेधा के आश्रम में जाकर दोनों ने यही मार्ग अपनाया और समाधान पाया.
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स्वस्थ शरीर और सशक्त मन का संबंध
नवरात्र केवल आध्यात्मिक साधना ही नहीं, बल्कि शारीरिक संतुलन का भी पर्व है. नौ द्वार वाले इस शरीर को स्वस्थ रखना आवश्यक है, क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही मजबूत मन और जागृत बुद्धि का विकास संभव है. व्रत और संयम इसी संतुलन को बनाए रखने में सहायक होते हैं.
