Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि केवल उत्सवों का समूह नहीं, बल्कि आदिशक्ति की उपासना का अत्यंत शक्तिशाली आध्यात्मिक पर्व है. जहां अन्य त्योहार मुख्य रूप से दिन में मनाए जाते हैं, वहीं नवरात्रि और महाशिवरात्रि ‘रात्रि’ की साधना से जुड़े पर्व माने जाते हैं. पंडित रजनीश पांडे बताते हैं कि इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, जो हमारे शरीर के सूक्ष्म ऊर्जा केंद्रों यानी चक्रों को सक्रिय करने में सहायक होती है. यह साधना आत्मिक उन्नति और मानसिक संतुलन प्रदान करती है.
नक्षत्र और चंद्रमा का विशेष प्रभाव
नवरात्रि के दौरान चंद्रमा विभिन्न नक्षत्रों से होकर गुजरता है, और प्रत्येक नक्षत्र किसी न किसी ग्रह द्वारा संचालित होता है. ये ग्रह हमारे मन, भावनाओं और जीवन की परिस्थितियों पर गहरा प्रभाव डालते हैं. वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ 19 मार्च को उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में हो रहा है. यह नक्षत्र शनि ग्रह के अधीन होता है और मीन राशि में स्थित है, जो गहराई, तपस्या और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक माना जाता है. इसके अधिष्ठाता देव ‘अहिर्बुध्न्य’ रहस्य, गूढ़ ज्ञान और आंतरिक शक्ति के प्रतीक हैं.
साधना से ग्रहों का संतुलन
यदि साधक अपने जन्म नक्षत्र या चंद्र नक्षत्र के अनुसार संबंधित देवी की आराधना करता है, तो इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है. यह साधना मन, बुद्धि और भावनाओं में संतुलन लाती है तथा कुंडली के कमजोर ग्रहों को भी मजबूत बनाती है. जिस दिन आपका जन्म नक्षत्र हो, उस दिन उपवास रखकर मां की पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है.
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रात्रि साधना का महत्व
नवरात्रि में रात्रि के समय की गई साधना अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है. इस दौरान माता के मंत्रों का जप करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. यह समय आत्मचिंतन, ध्यान और आंतरिक शक्ति को जागृत करने का श्रेष्ठ अवसर होता है.
