Maa Katyayani Chalisa: आज 24 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि का छठा दिन है. इस दिन को षष्ठी भी कहा जाता है. इस दिन देवी दुर्गा के मां कात्यायनी स्वरूप की पूजा की जाती है. मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत भव्य और दिव्य है. इनका वर्ण स्वर्ण के समान चमकीला है और वे सिंह पर सवार रहती हैं. माता की चार भुजाएं हैं: दाहिने हाथ अभय और वरद मुद्रा में भक्तों को आशीर्वाद देते हैं, जबकि बाएं हाथों में तलवार और कमल सुशोभित हैं. मान्यता है कि मां कात्यायनी की आराधना से शत्रुओं पर विजय और जीवन में सफलता की प्राप्ति होती है. माता की पूजा के समय चालीसा का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है, और कहा जाता है कि इससे पूजा के फल पर शुभ प्रभाव पड़ता है.
मां कात्यायनी की चालीसा
दोहा
जय कात्यायनी माँ, जय महिषासुर मारिणी।
सुर नर मुनि आराधित, जय मंगल करिणी॥
चौपाई
जय जय अंबे जय कात्यायनी।
जय महिषासुर घातिनी दानी॥
ब्रह्मा, विष्णु, शिव जी ध्यावैं।
शक्ति शक्ति सब जगत बनावैं॥
रक्तदंतिका और अन्नपूर्णा।
माँ कात्यायनी हैं सम्पूर्णा॥
कात्यायन ऋषि मुनि के आश्रय।
कात्यायनी मां सबके बासय॥
भय, संकट हरिणी तुही माता।
भक्तों के दुःख हरती आपा॥
जो कोई तुझको शरण में आवे।
मनवांछित फल वह नर पावे॥
ध्यान धार जो कोई नारी।
कात्यायनी पूर्ण सुखकारी॥
कुमारी पूजा जो नित ध्यावे।
अविवाहित जीवन न बितावे॥
हर युग में माँ तू सहाय।
जो भी भक्त करें मन लाय॥
कात्यायनी माँ तेरी महिमा।
सतयुग त्रेता हो या द्वापर॥
सिंह सवारी मां भवानी।
जय जय जय अंबे भवानी॥
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