Mata Kalratri Ki Aarti: चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है, जिन्हें दुष्ट शक्तियों का संहार करने वाली देवी माना जाता है. उनका स्वरूप भले ही उग्र दिखाई देता हो, लेकिन वे अपने भक्तों को सदैव शुभ फल प्रदान करती हैं. मां कालरात्रि की आराधना से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं, और जीवन में साहस व सुरक्षा का भाव बढ़ता है. पूजा के बाद आरती अवश्य करनी चाहिए, क्योंकि आरती के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है.
मां कालरात्रि की आरती (Mata Kalratri Ki Aarti)
कालरात्रि जय-जय महाकाली।
काल के मुख से बचाने वाली॥
दुष्ट संहारक नाम तुम्हारा।
महाचंडी तेरा अवतारा॥
पृथ्वी और आकाश पे सारा।
महाकाली है तेरा पसारा॥
खड्ग खप्पर रखने वाली।
दुष्टों का रक्त चखने वाली॥
कलकत्ता स्थान तुम्हारा।
सब जगह देखूं तेरा नजारा॥
सभी देवता सब नर-नारी।
गाएं स्तुति सभी तुम्हारी॥
रक्तदन्ता और अन्नपूर्णा।
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥
ना कोई चिंता रहे, ना बीमारी।
ना कोई गम, ना संकट भारी॥
उस पर कभी कष्ट ना आए।
महाकाली माँ जिसे बचाए॥
तू भी भक्त प्रेम से कह।
कालरात्रि माँ तेरी जय॥
मां कालरात्रि को इन चीजों का भोग लगाएं
- मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाना अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है.
- इस दिन गुड़ से बनी खीर या मिठाई का प्रसाद अर्पित करना लाभकारी होता है.
- गुड़ और नारियल का भोग लगाने से जीवन के कष्ट दूर होने की मान्यता है.
- गुड़ से बने पकवान चढ़ाने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
- गुड़ का दान करने से शनि दोष और बाधाएं कम होने की मान्यता है.
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