नहाय-खाय के साथ चैती छठ महापर्व शुरू, खरना आज

Chaiti Chhath 2026 Kharna Puja : चैती छठ महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय से हुई, व्रती खरना की तैयारी में जुटे, बाजारों में रौनक बढ़ी, सूर्य उपासना के इस पर्व में आस्था का अद्भुत संगम दिखा.

Chaiti Chhath 2026 Kharna Puja : चार दिवसीय चैती छठ महापर्व का शुभारंभ रविवार को नहाय-खाय के साथ हो गया. मौसम पूरी तरह साफ न होने और हल्की ठंड के बावजूद व्रतियों की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी. सुबह-सुबह श्रद्धालुओं ने तालाब, नदी, जलाशयों और डैम पर स्नान कर भगवान सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया और पर्व के मंगलमय आयोजन की कामना की.

नहाय-खाय का धार्मिक महत्व

नहाय-खाय छठ पर्व का पहला और बेहद महत्वपूर्ण दिन होता है. इस दिन व्रती शुद्धता का विशेष ध्यान रखते हुए स्नान के बाद सात्विक भोजन तैयार करते हैं. घरों में कद्दू (कटु), भात, दाल और सब्जी बनाई गई, जिसे पहले भगवान को अर्पित किया गया और फिर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया गया. इसके बाद यह प्रसाद परिवार और आस-पड़ोस में वितरित किया गया.

खरना की तैयारी और बाजारों में रौनक

नहाय-खाय के बाद व्रती खरना की तैयारियों में जुट गए हैं. सोमवार को खरना मनाया जाएगा, जिसमें व्रती पूरे दिन उपवास रखेंगे. शाम को खीर, रोटी, केला और अन्य फल भगवान को नैवेद्य के रूप में अर्पित किए जाएंगे. इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होगा. इसको लेकर बाजारों में भी खूब रौनक देखने को मिल रही है, जहां लोग पूजन सामग्री और फल-सामग्री की खरीदारी कर रहे हैं.

अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य और समापन

24 मार्च को व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे. इसके लिए श्रद्धालु जलाशयों पर एकत्र होंगे और विधि-विधान से पूजा करेंगे. वहीं 25 मार्च को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर इस महापर्व का समापन होगा.

गैस की कमी, पारंपरिक साधनों का सहारा

इस बार गैस की कमी के कारण व्रतियों ने लकड़ी, गोईठा और कोयले के चूल्हों का सहारा लिया है. चूंकि छठ प्रसाद बड़ी मात्रा में बनता है, ऐसे में ये पारंपरिक साधन काफी उपयोगी साबित हो रहे हैं. साथ ही खरना के लिए दूध की कमी न हो, इसके लिए व्रतियों ने पहले से ही डेयरी और खटालों में बुकिंग कर ली है.

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By Shaurya Punj

मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.

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