Gemstone Astrology: ज्योतिष शास्त्र में लहसुनिया रत्न का संबंध केतु ग्रह से बताया गया है. अंग्रेजी में इसे कैट्स आई स्टोन भी कहा जाता है. लहसुनिया बिल्ली की आंख जैसी चमक के लिए जाना जाता है. केतु एक छाया ग्रह है. इसे अध्यात्म, वैराग्य, रहस्य और अचानक होने वाले बदलावों से जोड़कर देखा जाता है. ज्योतिषाचार्य डॉ. एन. के. बेरा के अनुसार, कुंडली में केतु की स्थिति के अनुसार लहसुनिया धारण करने से व्यक्ति को इसके सकारात्मक परिणाम मिलते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि लहसुनिया किसे पहनना चाहिए और इसे धारण करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
लहसुनिया रत्न पहनने के क्या फायदे हैं?
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, जिन लोगों को चिड़चिड़ापन, मानसिक बेचैनी, शत्रु बाधा, काम में अड़चन या मन खराब रहने जैसी परेशानियां रहती हैं, उन्हें जन्मकुंडली में केतु की स्थिति देखने के बाद लहसुनिया धारण करने से शुभ परिणाम मिल सकते हैं. इसके साथ ही लहसुनिया धारण करने से आध्यात्मिक गुणों का विकास होता है. इससे मानसिक स्थिरता और एकाग्रता में वृद्धि हो सकती है.
व्यापार और प्रोफेशनल लाइफ में भी यह रत्न लाभकारी हो सकता है. इसके अलावा, इस रत्न को धारण करने से रुका हुआ पैसा वापस मिलने, व्यापार में लाभ और कार्यक्षेत्र में तरक्की के योग बन सकते हैं. शेयर बाजार जैसे क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए भी इसे प्रभावी माना जाता है.
लहसुनिया कौन लोग धारण कर सकते हैं?
यदि जन्मकुंडली में केतु दूसरे, चौथे, पांचवें, नौवें या दसवें भाव में स्थित हो, तो लहसुनिया धारण करना लाभकारी हो सकता है. इसके अलावा, केतु मंगल, बृहस्पति या शुक्र के साथ स्थित हो, तो भी ज्योतिषाचार्य की सलाह के बाद लहसुनिया धारण किया जा सकता है.
किन लोगों को लहसुनिया धारण नहीं करना चाहिए?
यदि कुंडली में केतु तीसरे, छठे, आठवें या 12वें भाव में स्थित हो, तो लहसुनिया धारण नहीं करना चाहिए.
लहसुनिया किन रत्नों के साथ नहीं पहनना चाहिए?
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, लहसुनिया को नीलम, मूंगा, माणिक, गोमेद और हीरा के साथ धारण नहीं करना चाहिए.
पुरुष और महिलाएं किस उंगली में पहनें लहसुनिया?
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, लहसुनिया धारण करने के लिए पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग हाथ बताए गए हैं.
- पुरुष: दाएं हाथ की कनिष्ठा यानी छोटी उंगली में लहसुनिया धारण कर सकते हैं.
- महिला: बाएं हाथ की छोटी उंगली में लहसुनिया धारण कर सकती हैं.
लहसुनिया को किस धातु में धारण करना चाहिए?
लहसुनिया को सोने या चांदी की धातु में धारण करने की सलाह दी जाती है.
लहसुनिया रत्न कब पहनें?
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, लहसुनिया को शनिवार को सूर्यास्त के बाद पूजा करके धारण करना चाहिए. यदि इस रत्न को शुक्ल पक्ष की द्वितीया, पंचमी, दशमी और एकादशी तिथि को आने वाले शनिवार को पहना जाए, तो यह लाभकारी माना जाता है. इसे सूर्यास्त के बाद धारण करना चाहिए.
लहसुनिया पहनने की विधि
- शनिवार के दिन स्नान करके साफ कपड़े पहनें.
- लहसुनिया को गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध करें.
- लहसुनिया को सोने या चांदी की अंगूठी में जड़वाएं.
- 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें.
- सूर्यास्त के बाद इसे छोटी उंगली में धारण करें.
लहसुनिया पहनने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
केतु को छाया और रहस्य का ग्रह माना जाता है. इसलिए इसे धारण करने से पहले ज्योतिषाचार्य से हस्तरेखा और जन्मकुंडली की जांच जरूर करवाएं. कुंडली में केतु की स्थिति और अन्य ग्रहों के साथ उसके संबंध को देखने के बाद ही लहसुनिया धारण करें.
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