Budh Pradosh Vrat 2026: आज यानी 15 अप्रैल को बुध प्रदोष व्रत रखा जा रहा है. इस दिन व्रत रखकर शाम के समय में भगवान शिव की पूजा करते हैं. इस बार के प्रदोष पूजा के लिए 2 घंटे 14 मिनट का मुहूर्त प्राप्त हो रहा है. यह प्रदोष व्रत वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाएगा. यह अप्रैल का पहला प्रदोष व्रत है. व्रत के दिन भद्रा लग रही है, जिसमें कोई शुभ कार्य न करें. आइए जानते हैं प्रदोष व्रत का मुहूर्त और दिनभर के शुभ समय.
काशी पंचांग (और मान्य पंचांगों) के अनुसार, वैशाख कृष्ण त्रयोदशी पर 15 अप्रैल 2026, बुधवार को बुध प्रदोष व्रत रखा जाएगा. इस दिन पूजा का मुख्य प्रदोष काल मुहूर्त शाम 06:47 से रात 09:00 बजे तक (अवधि 2 घंटे 14 मिनट) या कुछ पंचांगों के अनुसार 06:01 PM से 07:31 PM (90 मिनट) रहेगा, जो शिव पूजा के लिए अत्यंत शुभ है.
2 शुभ योग में बुध प्रदोष व्रत 2026
बुध प्रदोष व्रत के दिन दो शुभ योग हैं. ब्रह्म योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 01:25 पी एम तक है, उसके बाद से इंद्र योग बनेगा. प्रदोष व्रत की पूजा इंद्र योग में होगी. इस दिन पूर्व भाद्रपद प्रात:काल से लेकर दोपहर 03:22 पी एम तक है, उसके बाद उत्तर भाद्रपद नक्षत्र है. प्रदोष व्रत के दिन पंचक लगा है, जो पूरे दिन रहेगा. वहीं भद्रा रात में 10:31 बजे से लेकर 16 अप्रैल को 05:55 एएम तक है. इस भद्रा का वास धरती पर है. इस भद्रा में कोई शुभ काम न करें.
प्रदोष व्रत पूजा विधि
बुध प्रदोष व्रत पूजन विधि में प्रदोष काल में भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है, बेल पत्र, धतूरा, अक्षत, चंदन और गंगाजल अर्पित किया जाता है. साथ ही, शिव सहस्त्रनाम का पाठ करना विशेष फलदायी होता है.
स्नान और व्रत का संकल्प: सबसे पहले प्रातःकाल में स्नान करें और व्रत रखने का संकल्प लें. व्रत के दौरान सत्य बोलने और शाकाहारी आहार लेने का नियम होता है.
शिवलिंग पूजन: पूजा स्थल पर शिवलिंग स्थापित करें और उसे गंगाजल, दूध, शहद, चीनी, और घी से स्नान कराएं. फिर, शुद्ध वस्त्र पहनकर भगवान शिव की पूजा करें.
मंत्र जाप: पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्’ जैसे मंत्रों का जाप करें. इन मंत्रों से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. साथ ही बुध मंत्र ‘ॐ बुं बुधाय नमः’ इस मंत्र का जाप 108 बार करने से बुध देव की कृपा भी मिलती है.
दीपक जलाएं: पूजा के दौरान दीपक जलाएं और उसमें घी या तेल का प्रयोग करें. दीपक को शिवलिंग के पास रखें.
भोग अर्पित करें: पूजा के बाद भगवान शिव को फल, मिठाई, और ताजे फूल अर्पित करें. साथ ही, गाय के दूध और ताजा जल से भी शिवलिंग का पूजन करें.
रात्रि जागरण: यदि संभव हो तो रात्रि को जागरण करें और शिव का ध्यान करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें. यह व्रत और भी फलदायी होता है जब रात्रि को जागरण किया जाए.
