Baisakhi 2026: बैसाखी सिख धर्म का प्रमुख पर्व है, जो आस्था, सेवा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है. इस दिन गुरुद्वारों में विशेष दीवान, कीर्तन और लंगर का आयोजन होता है. श्रद्धालु गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेककर आशीर्वाद लेते हैं और जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं.
गुरुद्वारा दर्शन के धार्मिक नियम
बैसाखी के दिन गुरुद्वारा जाते समय कुछ नियमों का पालन करना जरूरी होता है. सिर को रुमाल या दुपट्टे से ढकना अनिवार्य है. जूते बाहर उतारकर और हाथ-पैर धोकर ही अंदर प्रवेश करना चाहिए. गुरु ग्रंथ साहिब के सामने शांत भाव से बैठना और श्रद्धा से अरदास करना विशेष महत्व रखता है. गुरुद्वारा परिसर में अनुशासन और स्वच्छता का ध्यान रखना भी आवश्यक है.
सेवा और लंगर की परंपरा
बैसाखी पर सेवा (सेवा भाव) का विशेष महत्व होता है. श्रद्धालु लंगर बनाने, परोसने और साफ-सफाई में सहयोग करते हैं. लंगर में सभी लोग बिना भेदभाव के एक साथ बैठकर भोजन करते हैं, जो समानता और भाईचारे का संदेश देता है. यह परंपरा सिख धर्म की सबसे महत्वपूर्ण पहचान मानी जाती है.
बैसाखी 2026 का शुभ समय
काशी विश्वनाथ पंचांग के अनुसार, इस वर्ष बैसाखी 14 अप्रैल, मंगलवार को मनाई जाएगी. इस दिन वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि रहेगी. सुबह 9 बजकर 31 मिनट पर सूर्यदेव वृषभ लग्न में मेष राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे मेष संक्रांति कहा जाता है. इसी परिवर्तन के साथ बैसाखी का पर्व मनाया जाता है.
इस दिन पुण्य काल सूर्योदय से लेकर शाम 3 बजकर 55 मिनट तक रहेगा, जो पूजा-पाठ और दान के लिए अत्यंत शुभ माना गया है.
ये भी देखें: कब है बैसाखी, यहां से जानें शुभ मुहूर्त
बैसाखी का आध्यात्मिक संदेश
बैसाखी हमें सेवा, त्याग और एकता का संदेश देती है. इस दिन गुरुद्वारा दर्शन कर, सेवा कार्यों में भाग लेकर और प्रभु का स्मरण करके व्यक्ति आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त कर सकता है.
