Bahula Chaturthi 2026 Importance and Mistakes: पंचांग के अनुसार, भाद्रपद (भादो) मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को बहुला चतुर्थी मनाई जाती है। इस साल यह पर्व सोमवार, 31 अगस्त को है. धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस दिन महिलाएं संतान की रक्षा, सुख-समृद्धि और लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं. इस व्रत में मुख्य रूप से गणेश जी, भगवान श्रीकृष्ण और गौ माता की पूजा की जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर इस व्रत में गौ माता की पूजा क्यों की जाती है? आइए जानते हैं बहुला चतुर्थी के व्रत में गौ माता का क्या महत्व है और व्रत के दौरान किन 5 गलतियों से बचना चाहिए.
बहुला चतुर्थी पर क्यों होती है गाय की पूजा?
पौराणिक कथा के अनुसार, बहुला नाम की एक गाय ने निष्ठा और अपने बछड़े के प्रति प्रेम का अद्भुत उदाहरण पेश किया था. कहा जाता है कि एक बार संकट में पड़ने के बावजूद वह अपने बछड़े को दूध पिलाने के बाद शेर को दिए गए वचन को निभाने के लिए वापस लौट आई थी. इसी वजह से इस पर्व का नाम बहुला चतुर्थी पड़ा.
मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा था कि भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को जो माताएं विधि-विधान से व्रत रखकर गौ माता और बछड़े का पूजन करेंगी, वे उनकी संतान की रक्षा करेंगे. कहा जाता है कि इस दिन गाय और बछड़े की पूजा करने से संतान को लंबी उम्र और आरोग्य का वरदान प्राप्त होता है.
बहुला चतुर्थी 2026 पूजा मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 31 अगस्त को सुबह 8 बजकर 50 मिनट से होगी. चतुर्थी तिथि का समापन 1 सितंबर को सुबह 7 बजकर 41 मिनट पर होगा.
पूजन के लिए शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 31 मिनट से 6 बजकर 57 मिनट तक रहेगा. इस दिन चंद्रोदय रात 8 बजकर 28 मिनट पर होगा. व्रती महिलाएं चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत का पारण कर सकती हैं.
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बहुला चतुर्थी के दिन क्या न करें?
- शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बहुला चतुर्थी के दिन गाय का दूध, दही या उससे बनी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए. इस दिन गाय के दूध से बनी चाय या कॉफी का सेवन भी नहीं करना चाहिए.
- इस दिन धारदार वस्तुओं का प्रयोग करने से बचना चाहिए. व्रती महिलाओं को सब्जी, फल काटने के लिए चाकू या अन्य धारदार वस्तुओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
- व्रत के दौरान गेहूं या चावल से बनी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए. परंपरानुसार, इस दिन बाजरा, मूंग और फलों का सेवन किया जाता है.
- जो लोग बहुला चतुर्थी का व्रत रखते हैं, उन्हें इस दिन गाय को दुहने से बचना चाहिए. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गाय के दूध पर उसके बछड़े का पहला अधिकार होता है.
- बहुला चतुर्थी के दिन व्रती महिलाओं को किसी पर भी गुस्सा करने से बचना चाहिए. मान्यता है कि व्रत के दौरान क्रोध करने से व्रत का शुभ फल प्राप्त नहीं होता.
