बड़ा मंगल 2026: भगवान हनुमान कैसे बने चिरंजीवी? जानें पौराणिक कथाओं में छिपा रहस्य

Bada Mangal: बड़ा मंगल का दिन भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. इस पावन अवसर पर आइए पौराणिक कथाओं के माध्यम से जानते हैं कि कलयुग के जीवंत देवता माने जाने वाले बजरंगबली को 'चिरंजीवी' होने का वरदान कैसे प्राप्त हुआ.

Bada Mangal: आज यानी 2 जून को पांचवां बड़ा मंगल है. इसे बुढ़वा मंगल के नाम से भी जाना जाता है. आमतौर पर ज्येष्ठ माह में हर वर्ष 4 या 5 बड़े मंगल पड़ते हैं, लेकिन वर्ष 2026 में ज्येष्ठ माह में अधिकमास होने के कारण कुल 8 बड़े मंगल पड़ रहे हैं. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान हनुमान की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से जीवन के दुख-कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है. ऐसे में भगवान हनुमान के चिरंजीवी बनने से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं. आइए जानते हैं उनमें से कुछ प्रमुख कथाओं के बारे में.

1. माता सीता का आशीर्वाद

रामायण के सुंदरकांड में वर्णित कथा के अनुसार, जब हनुमान जी प्रभु श्रीराम की अंगूठी लेकर लंका पहुंचे और अशोक वाटिका में माता सीता को खोज निकाला, तब माता सीता श्रीराम के वियोग में अत्यंत दुखी थीं. हनुमान जी ने उन्हें प्रभु श्रीराम का संदेश सुनाया और अपनी अनन्य भक्ति तथा सेवा भाव का परिचय दिया. हनुमान जी की निष्ठा और समर्पण से प्रसन्न होकर माता जानकी ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा

“अजर अमर गुननिधि सुत होहू. करहुं बहुत रघुनायक छोहू॥” 

अर्थात, “हे पुत्र! तुम अजर-अमर और समस्त गुणों के भंडार बनो. प्रभु श्रीराम की कृपा सदैव तुम पर बनी रहे.” मान्यता है कि माता सीता के इस आशीर्वाद से हनुमान जी को अमरत्व का वरदान प्राप्त हुआ.

2. देवराज इंद्र का वज्र और देवताओं के वरदान

हनुमान जी के चिरंजीवी बनने की एक अन्य कथा उनके बाल्यकाल से जुड़ी है. एक बार बाल हनुमान ने सूर्य देव को लाल फल समझकर निगलने का प्रयास किया. इससे संपूर्ण सृष्टि में अंधकार फैल गया. तब देवराज इंद्र ने ब्रह्मांड की रक्षा के लिए अपने वज्र से प्रहार किया, जिससे हनुमान जी मूर्छित होकर धरती पर गिर पड़े.

अपने पुत्र की यह स्थिति देखकर पवन देव अत्यंत क्रोधित हो गए और उन्होंने समस्त संसार में वायु का प्रवाह रोक दिया. इससे सभी जीव-जंतु और देवता संकट में पड़ गए. तब ब्रह्मा जी सहित सभी देवता पवन देव को शांत करने पहुंचे.

देवताओं ने हनुमान जी को अनेक दिव्य वरदान दिए. ब्रह्मा जी ने उन्हें किसी भी अस्त्र-शस्त्र से अवध्य होने का वरदान दिया, जबकि अन्य देवताओं ने भी उन्हें असाधारण शक्तियां और दीर्घायु प्रदान की. इन्हीं वरदानों के कारण हनुमान जी चिरंजीवी माने गए.

3. प्रभु श्रीराम का आदेश

जब त्रेतायुग के अंत में भगवान श्रीराम अपने धाम लौटने लगे, तब हनुमान जी भी उनके साथ जाने की इच्छा व्यक्त करने लगे. किंतु श्रीराम जानते थे कि आने वाले कलियुग में धर्म और भक्तों की रक्षा के लिए हनुमान जी का पृथ्वी पर रहना आवश्यक है.

तब श्रीराम ने हनुमान जी को आदेश दिया कि वे पृथ्वी पर रहकर भक्तों की रक्षा करें. मान्यता है कि जब तक संसार में राम नाम का जाप और रामकथा का श्रवण होता रहेगा, तब तक हनुमान जी अदृश्य रूप में वहां उपस्थित रहेंगे और अपने भक्तों की सहायता करते रहेंगे. इसी कारण भगवान हनुमान को सप्त चिरंजीवियों में एक माना जाता है और यह विश्वास किया जाता है कि वे आज भी अपने भक्तों के बीच विद्यमान हैं.

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Published by: Neha Kumari

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