विवाह का योग कब बनेगा? जन्म कुंडली से जानिए सही समय

Vivah Yog: शादी–विवाह जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है, और ज्योतिष के अनुसार इसका समय जन्म कुंडली से जाना जा सकता है. ग्रहों की स्थिति, दशा और गोचर यह संकेत देते हैं कि शादी जल्दी होगी या देर से.

Vivah Yog: कुंडली में विवाह योग का सही विश्लेषण कर आप सटीक समय जान सकते हैं. कुंडली में 12 भाव होते हैं. सभी भाव के स्वामी ग्रह होते हैं. कुंडली के सप्तम और पंचम भाव के स्वामी ग्रह एक साथ हो तो प्रेम विवाह का योग बनता है. आइए जानते है आचार्य विनोद त्रिपाठी से जन्म कुंडली से विवाह योग कैसे पता कर सकते है-

जन्म कुंडली से पाएं विवाह के संकेत

कुंण्डली में सप्तम और द्वितीय भाव के स्वामी ग्रह स्वराशि में विराजमान है एवं उसके साथ पंचमेश शनि भी विराजमान है. यहां  एक समस्या है.  मंगल और शनि जब भी एक साथ विराजमान होते हैं, तो इसे अच्छा योग नहीं माना जाता है. कई ज्योतिष ग्रन्थों में इसे विस्फोटक योग बोला गया है. यहां पंचमेश और सप्तमेश का सम्बन्ध तो हो गया, परन्तु शनि मंगल का योग अच्छा नहीं होने के कारण इसका फल प्राप्त नहीं हुआ.

जन्म कुंडली में विवाह योग

एक योग को सभी लग्न की कुंण्डलियों में माना नहीं जा सकता, दूसरी बात सप्तम भाव में राहु विराजमान है. केतु की दृष्टि है. यह वैवाहिक जीवन के सुख में बहुत ज्यादा परेशानी उत्पन्न कर रहा है, जिसके कारण प्रेम विवाह तो क्या सामान्य विवाह भी होने में बहुत ज्यादा समस्या होती है. इनका विवाह हुआ एवं विवाह होने के बाद तलाक हो गया, शनि यदि  सप्तम भाव के स्वामी के साथ सम्बन्ध बनाते हैं एवं सप्तमेश  तथा शनि में शत्रुता होती है, तब विवाह में बहुत ज्यादा विलम्ब हो जाती है. 

विवाह में देरी या जल्दी?

कई लोगों की चालिस वर्ष तक भी विवाह नहीं हो पाता  है और धीरे-धीरे विवाह की इच्छाएं समाप्त हो जाती हैं. कुंण्डली में सप्तमेश शनि के साथ विराजमान है सप्तम भाव में राहु विराजमान है उस पर केतु की दृष्टि है. अर्थात शनि राहु केतु के प्रभाव के कारण वैवाहिक जीवन में समस्या हुई. इसलिए बचपन में ही जन्म कुंण्डली विश्लेषण  कर ऐसे योग होने पर जो  ग्रह परेशानी उत्पन्न कर रहे हैं, उनका उपाय पहले से ही प्रारम्भ करना चाहिए.

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लेखक के बारे में

Published by: Radheshyam Kushwaha

राधेश्याम कुशवाहा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से MJ (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत भोपाल से प्रकाशित राज एक्सप्रेस समाचार पत्र से की. इसके बाद उन्होंने समय जगत, राजस्थान पत्रिका और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं. वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म, अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 13 वर्षों का अनुभव रखने वाले राधेश्याम कुशवाहा को ज्योतिष शास्त्र, पंचांग गणना, ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, व्रत-त्योहारों की तिथियों तथा शुभ मुहूर्तों का गहन ज्ञान है. अपनी विशेषज्ञता के आधार पर वे धर्म-अध्यात्म और राशिफल से जुड़ी सटीक, तथ्यपरक एवं विश्वसनीय खबरें लिखते हैं. धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि है. इसके अलावा राजनीति, अपराध और प्रेरणादायक (पॉजिटिव) विषयों पर लेखन में भी उनकी गहरी रुचि है.

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