Aja Ekadashi 2026: अजा एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित व्रत है. यह भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है. साल 2026 में यह व्रत आज, 7 सितंबर, सोमवार को रखा जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और भगवान श्रीहरि विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने से जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्य की प्राप्ति होती है. साथ ही, घर में सुख-समृद्धि आती है. हिंदू धर्म में पूजा के अंत में आरती करने का भी विशेष महत्व माना जाता है. मान्यता है कि आरती करने से पूजा का शुभ फल बढ़ता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
आरती करने के नियम
- दीपक और सामग्री: आरती के लिए तांबे या पीतल का दीपक इस्तेमाल करें. इसमें घी और रुई या कलावे की बाती लगाएं. कपूर से भी आरती कर सकते हैं.
- आरती कैसे घुमाएं: सबसे पहले भगवान के चरणों के पास आरती घुमाएं. इसके बाद नाभि और फिर चेहरे के पास आरती करें. अंत में पूरे शरीर के सामने आरती घुमाएं.
- आरती की दिशा: आरती हमेशा घड़ी की सुई की दिशा में घुमाएं.
- आरती करते समय: भगवान के सामने खड़े होकर आरती करें.
- आरती लेने का तरीका: आरती पूरी होने के बाद दोनों हाथों से लौ की गर्माहट लें और हाथों को माथे और आंखों से लगाएं. अपनी श्रद्धा के अनुसार आरती की थाली में पैसे भी रख सकते हैं.
- क्षमा मांगें: आरती पूरी होने के बाद हाथ जोड़कर भगवान से अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें और सुख-शांति की प्रार्थना करें.
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भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय…॥
जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का। सुख-सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी॥ ॐ जय…॥
तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता। मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय…॥
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