Adhik Ram Laxman Dwadashi 2026: वैदिक पंचांग के अनुसार, हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को रामलक्ष्मण द्वादशी मनाई जाती है. इसे चंपक द्वादशी भी कहा जाता है. यह पावन दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और उनके परम प्रिय भाई लक्ष्मण जी को समर्पित है. वर्ष 2026 में ज्येष्ठ माह बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि इस बार ज्येष्ठ अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) का दुर्लभ संयोग बन रहा है. इसी वजह से इस वर्ष इस पर्व को अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी कहा जाएगा.
अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
- द्वादशी तिथि की शुरुआत: 27 मई 2026 को सुबह 06 बजकर 21 मिनट से.
- द्वादशी तिथि का समापन: 28 मई 2026 को सुबह 07 बजकर 56 मिनट पर.
उदयातिथि और शास्त्रों के नियमों के अनुसार, 27 मई 2026, बुधवार को अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी का व्रत रखा जाएगा और पूजा की जाएगी.
पूजा की विधि
- द्वादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद भगवान के समक्ष हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें.
- घर के मंदिर में या पूर्व दिशा में एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण जी और माता सीता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. साथ ही श्रीकृष्ण की मूर्ति भी रखें.
- भगवान को रोली, चंदन, अक्षत, धूप, दीप, फूल और घी का दीपक अर्पित करें. इस दिन भगवान को चंपा के सुगंधित फूल या कोई भी सफेद अथवा पीले रंग के फूल अवश्य चढ़ाएं.
- पूजा के दौरान रामायण की चौपाइयों का पाठ करें और प्रभु श्रीराम के मंत्रों का जाप करें. अंत में घी के दीपक या कपूर से आरती करें.
रामलक्ष्मण द्वादशी का धार्मिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेतायुग में राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति की कामना से यह व्रत पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से किया था. इस व्रत के पुण्य प्रभाव से ही भगवान विष्णु ने श्रीराम और शेषनाग ने लक्ष्मण जी के रूप में उनके घर अवतार लिया.
इस दिन भगवान श्रीराम, भाई लक्ष्मण और श्रीकृष्ण की संयुक्त उपासना का विशेष महत्व माना जाता है. मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु इस दिन सच्चे मन से पूजा और उपवास करता है, उसके समस्त पापों का नाश होता है तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है.
यहां पढ़ें धर्म से जुड़ी बड़ी खबरें: Religion News in Hindi – Spiritual News, Hindi Religion News, Today Panchang, Astrology at Prabhat Khabar
