ग्रह दशा : शनिवार से चैत्र नवरात्र के साथ प्रारंभ होगा नव वर्ष कीलक संवत्सर
बेतिया : हिंदी नव संवत्सर का शुभारंभ शुक्रवार की दोपहर 3.36 बजे से हो रहा है. लेकिन उदयीकाल लग्न शनिवार होने के कारण 21 मार्च से इसे प्रभावी माना जायेगा.यह षष्टि संवत्सर चक्र का 42वां और रुद्र बीसी का दूसरा संवत्सर है. ज्योतिषाचार्यो के मुताबिक इस वर्ष कीलक संवत्सर शुरू होगा. पौराणिक मान्यता है कि इस दिन सृष्टि की रचना हुई थी और इसी दिन से विक्रम संवत का आरंभ हुआ.
उत्थान ज्योतिष संस्थान के निदेशक पंडित दिवाकर त्रिपाठी ने बताया कि इस बार संवत्सर के राजा शनि, मंत्री मंगल और वाहन घोड़ा है. जो देश की राजनीतिक, आर्थिक, प्राकृतिक और सुरक्षा में बदलाव का कारक बनेगा. संवत्सर का राजा शनि होने के कारण इस वर्ष वर्षा कम होगी. लिहाजा सूखा पड़ने की प्रबल संभावना है. मंत्री के पद मंगल के होने से शासन, सत्ता में अराजकता की बढोत्तरी होगी. जबकि प्रशासन का रुख सकारात्मक होगा.
लगेंगे चार ग्रहण, पहला चार अप्रैल को
चैत्र शुल्क पूर्णिमा(चार अप्रैल) को खग्रास चंद्र ग्रहण लगेगा. जो दिन में 3.45 बजे से शाम 5.30 तक रहेगा. मोक्ष काल रात 7.15 है. इसके बाद भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अमावस्या(13 सितंबर) को सूर्य ग्रहण लगेगा. तीसरा खग्रास भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा(28 सितंबर) को लगेगा.
अंतिम और चौथा सूर्य ग्रहण फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अमावस्या(नौ मार्च 2016) को लगेगा.
आठ दिनों का होगा नवरात्र
नव संवत्सर के संग ही 21 मार्च से चैत्र रामनवमी का भी आरंभ हो रहा है. ज्योतिषाचार्यो के मुताबिक इस बार नवरात्र में षष्ठी का लोप है. लिहाजा नवरात्र आठ दिनों का ही होगा.
कैसा होगा नया वर्ष?
मेष- राजनीतिक वर्चस्व, उत्तरार्ध सुख
वृष- धन और पराक्रम में वृद्धि, संघर्ष
मिथुन- शत्रुओं पर विजय, धन लाभ
कर्क- विवाद, संघर्षपूर्ण सफलता
सिंह- धन क्षति, आतंरिक समस्या
कन्या- धन वृद्धि, भय से मुक्ति
तुला- अध्ययन में रुचि, आय के नये साधन
वृश्चिक- भाग्य और सुख में वृद्धि
धनु- स्वास्थ्य क्षति, व्यय में बढ़ोत्तरी
मकर- पराक्रम, सुख व आय में वृद्धि,
कुंभ- स्वास्थ्य वृद्धि, आय के नये साधन
मीन- दांपत्य में कटुता
