हम अपने मस्तिष्क को पूर्ण स्वस्थ ढंग से कार्य करने में कुछ मदद दे सकते हैं. इसके दो तरीके हैं, साधना और योगनिद्रा. मंत्रों के उच्चारण के समय ध्वनि की जो विशिष्ट आंदोलनयुक्त तरंगें निर्मित होती हैं, वे सीधे आपके मस्तिष्क पर प्रभाव डालती हैं. इन ध्वनि-तरंगों से पत्थर भी तोड़े जा सकते हैं.
एक बार सम्राट अकबर के दरबार में तानसेन और बैजू बावरा में मुकाबला हुआ. एक संगमरमर की शिला रखी गयी और शर्त थी कि अपने गायन से जो उस शिला को तोड़ देगा वही इस मुकाबले का विजेता माना जायेगा. और कंठ से निकली हुई ध्वनि-तरंगों से बैजू बावरा ने सचमुच उस शिला को तोड़ दिया. इन ध्वनि की तरंगों में से बड़ी ऊर्जा, बड़ी शक्ति निकलती है. जब आप मंत्रोच्चर करते हैं, तब उससे उत्पन्न ध्वनि तरंगों का आपके मस्तिष्क की तीनों ग्रंथियों पर सीधा प्रभाव पड़ता है.
गायन के समय आप कान बंद कर लेते हैं, जिससे आप बाहर की कोई आवाज न सुन सकें. ऐसा करने से ध्वनि तरंगें सीधे आपके मस्तिष्क में पहुंच कर मस्तिष्क की सूक्ष्म संरचना को बदलना शुरू कर देती हैं. औषधि विज्ञान में हाइपरटेंशन को दूर करने की कोई दवा नहीं है. इसका सबसे बड़ा कारण तनाव को माना जाता है. अभी तक जितनी दवाएं बनी हैं वे केवल तनाव के कारण शरीर में आनेवाले लक्षणों को दूर करने के काम आती हैं. औषधि विज्ञान ने अभी तक ऐसी कोई गोली नहीं बनायी है, जिसके सेवन से मस्तिष्क में तनाव ही न रहे. परंतु ऋषियों के पास ऐसी दवा थी जिसको मंत्र कहते हैं.
आनंदमूर्ति गुरु मां
