धर्म हमारे जीवन की इतनी महत्वपूर्ण घटना है कि मनुष्य धर्म के बिना जीवित नहीं रह सकता है. और धर्म के बिना जीना, बिना किसी उद्देश्य के जीना है. धर्म के बिना जीवन, काव्यविहीन, सौंदर्यविहीन जीवन है. धर्म के बिना जीवित रहना उबाऊ है. सार्त् ने कहा है-‘मैन इज ए यूजलेस पैशन.’ धर्म के बिना मनुष्य ऐसा ही हो जाता है.
मनुष्य यूजलेस पैशन नहीं है, लेकिन बिना धर्म के मनुष्य निश्चित ही ऐसा हो जाता है. अगर तुमसे ज्यादा ऊंचा कुछ न हो, तो फिर जीवन के सारे उद्देश्य तिरोहित हो जाते हैं. अगर मनुष्य को अपने से ऊपर पहुंचने की कोई ऊंची जगह न हो, ऊपर उठने को कुछ न हो, तो फिर मनुष्य के जीवन का कोई अर्थ नहीं रह जाता है. मनुष्य को अपने से ऊपर उठने के लिए, उससे श्रेष्ठ कुछ होना चाहिए, ताकि वह नीचे अटक कर न रह जाये. बिना धर्म के मनुष्य का जीवन एक ऐसा जीवन होगा, जिसमें फल-फूल नहीं आते.
हां, तब बिना धर्म के मनुष्य एक यूजलेस पैशन ही हो सकता है. लेकिन धर्म के साथ होकर मनुष्य के जीवन में एक सौंदर्य आ जाता है, जैसे कि परमात्मा ने उसे भर दिया हो. आज जीवन के प्रति एक नये दृष्टिकोण को खोज लिया गया है. अब विज्ञान के माध्यम से मनुष्य के पास एक नया द्वार खुल गया है. धर्म अभी तक विज्ञान के इस नये आयाम को आत्मसात नहीं कर पाया है. धर्म विज्ञान को अपने में आत्मसात कर लेने में इसलिए असफल है, क्योंकि तथाकथित धर्म विज्ञान को अपने में आत्मसात करने में असमर्थ है.
आचार्य रजनीश ‘ओशो’
