15:15:15 की संक्रांति, 83 साल बाद तीन ग्रहों का योग

गोपालगंज : मकर संक्रांति का पर्व इस बार दो दिन मनाया जायेगा. सूर्य यूं तो 14 जनवरी की शाम 7.28 बजे मकर राशि में प्रवेश कर जायेगा. शास्त्रों में संक्रांति काल से पहले के छह घंटे 24 मिनट और बाद के 16 घंटे पुण्यकाल माना गया है. पुण्यकाल 14 जनवरी की दोपहर 1.04 मिनट से […]

गोपालगंज : मकर संक्रांति का पर्व इस बार दो दिन मनाया जायेगा. सूर्य यूं तो 14 जनवरी की शाम 7.28 बजे मकर राशि में प्रवेश कर जायेगा.
शास्त्रों में संक्रांति काल से पहले के छह घंटे 24 मिनट और बाद के 16 घंटे पुण्यकाल माना गया है. पुण्यकाल 14 जनवरी की दोपहर 1.04 मिनट से शुरू हो जायेगा, जो 15 की सुबह 11. 28 बजे तक रहेगा. संक्रांति काल संध्याकाल में है. शास्त्रों में उदय काल में संक्रांति का पुण्यकाल श्रेष्ठ माना गया है.
इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व माना गया है. इस महापर्व की खास बात यह है कि 15 जनवरी, 2015 को 15 वां नक्षत्र स्वाति और 15 मुहूर्त तिथि होगी. इसके साथ ही दिन पांचवां बार गुरुवार 10वीं तिथि का योग भी 15 होगा.
सूर्य-शुक्र और बुध के योग
तिथि, काल और सूर्य-पृथ्वी की गति के कारण इस बार मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनेगा. मकर संक्रांति पर्व पर 83 साल बाद 15 जनवरी को उच्चस्थ बृहस्पति से तीन ग्रहों का समसप्तक योग भी बनेगा. मकर राशि में सूर्य-शुक्र और बुध के योग के उच्चस्थ बृहस्पति का योग बनायेगा. ज्योतिषविद् डॉ पंकज शुक्ला की मानें, तो ऐसा योग सरकारी योजनाओं में जनता को पूर्ण लाभ दिलानेवाला साबित होगा.
शनि देव बरसायेंगे कृपा दृष्टि
सूर्य देवता धनु राशि से निकल कर मकर में प्रवेश करने पर भी तिल का महत्व बढ़ता है. शनि देव के घर में सूर्य की उपस्थिति के दौरान शनि उन्हें कष्ट न दें. इसलिए तिल का दान उत्तम माना जाता है. वैसे पूरा साल शनि देव अपनी कृपा दृष्टि बनाये रखेंगे.
तिल का विशेष महत्व
ज्योतिष विशेषज्ञ डॉ विजय ओझा ने बताया मकर संक्रांति पर्व को तिल संक्रांति के नाम से भी पुकारा जाता है. माघ मास में जो व्यक्ति विष्णु भगवान की पूजा तिल से करते हैं, तिल का सेवन करते हैं, उनके पाप कट जाते हैं. सिर्फ तिल-जिल जाप करने से पुण्य की प्राप्ति होती है.

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