पटना: मकर संक्रांति का विशेष पर्व इस वर्ष 15 जनवरी को मनाया जायेगा. क्योंकि सभी पंचांगों के अनुसार सूर्य का धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात्रि 1.20 मिनट पर हो रहा है. पंडित मरकडेय शारदेय के अनुसार ऋषिकेश पंचांग के अनुसार 14 की रात्रि 1.19 मिनट पर, महावीर पंचांग के अनुसार 1.20 मिनट पर व मिथिला पंचांग के अनुसार रात्रि एक बजे से प्रवेश हो रहा है. शास्त्र के अनुसार 12 बजे रात्रि के बाद जब भी मकर संक्रांति होती है, तो उसका पूर्णकाल अगले दिन मनाया जाता है. इससे 14 को मकर संक्रांति न मना कर अगले दिन 15 जनवरी
( गुरुवार) को मनायी जायेगी.
होगी अच्छी पैदावार
मकर संक्रांति का यह पर्व अलग-अलग प्रदेशों में विविध रूपों में मनाया जाता है. हिंदू धर्म के अनुसार, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है. तब मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है, जो इस वर्ष बुधवार की रात्रि 1.20 मिनट पर प्रवेश कर रहा है. इस दिन मंदाकिनी नामक योग का सृजन हो रहा है, जो सरकार के लिए शुभ है. साथ ही वाणिज्य नामक करण में होने से कृषि के लिए उत्तम वर्ष है, जो पैदावार में इच्छा मुताबिक फल देगा. वहीं स्वाति नक्षत्र में होने से आम आदमी के लिए सामान्य फलदायक रहेगा. इसी दिन से सभी शुभ व मांगलिक कार्यो की शुरुआत होती है.
दान का विशेष महत्व
सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण होने पर इस दिन स्नान दान कर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. इस दिन किये गये दान-पुण्य का विशेष महत्व है. शास्त्रों के अनुसार शिशिर ऋतु में अग्नि न को अमृत समान माना गया है. ऐसे में अंगीठी का दान करना शुभ माना गया है. इस दिन सभी स्नान कर चावल, उड़द दाल, तिल, घी, मिठाई, अगिA व गरम वस्त्रों का दान करें. इससे शुभ फल की प्राप्ति होती है.
तिल के सेवन से कष्ट दूर
इस दिन तिल खाने का विशेष महत्व है. शनि के दुष्प्रभाव से मुक्ति पाने के लिये तिल का सेवन व दान किया जाने का विधान है. शास्त्रों के अनुसार सूर्य देवता धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. मकर राशि के स्वामी शनि देव हैं, जो सूर्य के पुत्र होने के बावजूद सूर्य से शत्रुता रखते हैं. अत: शनि देव के घर में सूर्य की उपस्थिति के दौरान शनि उन्हें कष्ट न दे इस लिये तिल का दान व सेवन किया जाता है. साथ ही गंगा स्नान का विशेष महत्व है. प्रचलित कृत सार के अनुसार माघ माह में जब सूर्य मकर राशि में जाते हैं, तो सभी लोग तीर्थ या प्रयाग जाते हैं.
सात दिनों में 30 लाख लीटर दूध की होगी आपूर्ति
मकर संक्रांति को लेकर शहर में अतिरिक्त दूध व दही की आपूर्ति होगी. लोगों को दूध व दही की किल्लत न हो. इसके लिए शहर की विभिन्न डेयरियों ने तैयारी कर ली है. आम दिनों के मुकाबले आठ से 14 जनवरी तक डेयरी द्वारा अधिक मात्र में दूध की सप्लाइ की जायेगी. बूथों के अलावा सुधा डेयरी ने टैंकर के माध्यम से भी दूध उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है. शहर की सबसे बड़ी डेयरी सुधा आम दिनों में शहर में प्रतिदिन 2.40 लाख लीटर दूध की आपूर्ति करती है. वहीं मकर संक्रांति को लेकर सुधा के लगभग 1200 से अधिक आउटलेट के जरिये सात दिनों में 25 लाख लीटर दूध व दो लाख किलो दही की सप्लाइ की जायेगी. पिछले साल 19 लाख लीटर दूूध व 65 टन दही की सप्लाइ की गयी थी. दही 200 ग्राम, 400, दो, पांच, 15 व 18 किलो के पैक में उपलब्ध रहेगा. अनुज डेयरी के महाप्रबंधक कृष्ण कुमार सुमन ने बताया कि मकर संक्रांति पर पांच लाख लीटर दूध व पांच टन दही की आपूर्ति होगी.
इन जगहों पर लगेगा टैंकर
सुधा डेयरी का टैंकर 12 व 13 जनवरी को राजवंशीनगर, सब्जीबाग, कदमकुआं, कंकड़बाग व पीरमुहानी जगहों पर लगेगा. सुधा से संबंधित कोई परेशानी हो,तो लोग मोबाइल नंबर 9835035201 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं. कालाबाजारी न हो. इसको लेकर फ्लाइंग स्क्वायड का भी गठन किया गया है. पटना डेयरी प्रोजेक्ट के एमडी सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि मकर संक्रांति पर दूध व दही की किल्लत नहीं होगी. पर्याप्त मात्र में सप्लाइ की जायेगी. किसी को दूध व दही की जरूरत हो, तो नजदीक के बूथ पर पहले ही ऑर्डर दें.
नारियल से लेकर खोया तिलकुट बाजार मे
मकर संक्रांति नजदीक आते ही तिलकुट बाजार ने जोर पकड़ लिया है. थोक व्यापारी निर्माण कार्य में जोर-शोर से लग गये हैं. मीठापुर,कदमकुआं, बुद्ध मार्ग,बाकरगंज,सब्जीबाग,ठाकुरबाड़ी रोड,दरियापुर गोला व मछुआटोली समेत आसपास के इलाकों में तिलकुट के लिए लोगों की भीड़ लग रही है. ग्राहकों को लुभाने के लिए तिलकुट के तरह-तरह के वेरायटीज भी बाजार में हैं. बाजार में खोआ से लेकर नारियल युक्त तिलकुट उपलब्ध हैं. इसके अलावा बाजार में पिड़िकिया तिलकुट,गुड़ व खोआ तिलकुट उपलब्ध है. तिलकुट बनाने का काम नवंबर से ही शुरूहो जाता है,जो मकर संक्रांति तक चलता है. जाड़े में तिलकुट की अच्छी बिक्री होती है. कदमकुआं स्थित मधु तिलकुट भंडार के प्रोपराइटर रामाशंकर यादव ने बताया कि ऐसे तो सभी तिलकुट की बिक्री ठीक-ठाक होती है, लेकिन खोआ तिलकुट की डिमांड है. डायबिटीज के रोगियों के लिए सुगर फ्री तिलकुट तैयार किया गया है. बाजार में तिल का लड्डू व रेवड़ी भी डिमांड में है. वहीं गजक और स्पेशल तिलपापड़ी चीनी और गुड़ दोनों में उपलब्ध है. मालभोग चूड़ा बाजार में 80 रुपये प्रति किलो में उपलब्ध है.
