जीवित्पुत्रिका व्रत 16 को

जीवित्पुत्रिका व्रत पुत्र की दीर्घायु के लिए रखा जाता है. पुत्र के आयुष्य एवं मंगल के लिए किया जानेवाला कठिनतम व्रत जियुतिया (जीवित्पुत्रिका) निर्जला उपवास और पूजा-अर्चना के साथ संपन्न होता है. इस बार जीवित्पुत्रिका व्रत 16 सितंबर, 2014 मंगलवार के दिन मनाया जायेगा और 17 सितंबर बुधवार को प्रात: काल व्रत का पारण संपन्न […]

जीवित्पुत्रिका व्रत पुत्र की दीर्घायु के लिए रखा जाता है. पुत्र के आयुष्य एवं मंगल के लिए किया जानेवाला कठिनतम व्रत जियुतिया (जीवित्पुत्रिका) निर्जला उपवास और पूजा-अर्चना के साथ संपन्न होता है. इस बार जीवित्पुत्रिका व्रत 16 सितंबर, 2014 मंगलवार के दिन मनाया जायेगा और 17 सितंबर बुधवार को प्रात: काल व्रत का पारण संपन्न होगा.

परंपरा के अनुसार व्रती मां सोमवार यानी 15 सितंबर को सिर से स्नान कर दिवंगत महिला पूर्वज को तेल, खल्ली व जल-दान करेगी. रात में तीन बजे तक ओठगन होगा. इसके बाद पानी भी नहीं ग्रहण किया जायेगा. मंगलवार को दोनों शाम निर्जला व्रत करेंगी. दिन में चिल्हो व सियारो की पूजा होगी और प्रसाद चढ़ाने के साथ व्रती जिवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनेंगी. बुधवार को सूर्योदय के बाद वे उपवास तोड़ेंगी.

भगवान शंकर ने कहा है कि जो सौभाग्यवती स्त्री जीमूतवाहन को प्रसन्न करने के लिए व्रत एवं पूजन करती है और कथा सुनती है, वह अपने पुत्रों के साथ सुखपूर्वक समय बिता कर अंत में विष्णुलोक प्रस्थान करती है.
* संदिग्ध व्रत-निर्णय : जीवत्पुत्रिका व्रत तथा महालक्ष्मी व्रत के लिए पूर्व या विद्ध अष्टमी चंद्रोदय ब्यापिनी ही ग्राह्य है. आश्विन कृष्ण में जिस दिन चंद्रोदय काल में अष्टमी प्राप्त हो उस दिन लक्ष्मी व्रत और जिस सूर्योदय में प्राप्त हो उस जीवित्पुत्रिका का व्रत करना चाहिए.

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