फरवरी के पहले दिन मनाई जाएगी विनायक चतुर्थी, जानें इसके फायदे

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Vinayak Chaturthi 2025: विनायक चतुर्थी का दिन सभी बप्पा के भक्तों के लिए खास होता है.यह वरद विनायक चतुर्थी के नाम से प्रचलित है. यह दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है,हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व प्रत्येक माह के चौथे दिन मनाया जाता है, इस शुभ अवसर पर लोग उपवास, प्रार्थना और कई सारे श्रद्धा से अनुष्ठान का पालन करते हैं, आज साल की पहली चतुर्थी मनाई जा रही है, जिसका अपना एक खास महत्व है,ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से ज्ञान, धैर्य और सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है.

विनायक चतुर्थी व्रत महत्व

इस भगवान गणेश की विधि भक्ति भाव पूर्वक पूजा करनी चाहिए.धार्मिक मान्यता है कि इनकी उपासना से जीवन की सभी कष्ट का निवारण होता हैं, इस शुभ दिन पर पूजा-अर्चना करने से आपके जीवन में आर्थिक स्थिति में परिवर्तन होता है,साथ ही अधूरे कार्य पूर्ण होते हैं. व्रत और ध्यान करने से मन को शांति, धैर्य और आत्मा को शांति मिलती है.

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विनायक चतुर्थी शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 08 मिनट से आरंभ होकर दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक समाप्त होगा .रवि योग सुबह 07 बजकर 14 मिनट से रात 10 बजकर 22 मिनट तक होगा,गोधूलि मुहूर्त शाम 05 बजकर 34 मिनट से 06 बजकर 02 मिनट तक रहेगा.

वहीं, निशिता मुहूर्त रात्रि 11 बजकर 59 मिनट से 04 जनवरी रात 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा. इस दौरान आप किसी भी प्रकार का मांगलिक कार्य कर सकते हैं जो शुभ होगा.

धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी विनायक चतुर्थी व्रत कथा

विनायक चतुर्थी के व्रत से जुड़ी धार्मिक कथा के अनुसार, भगवान गणेश ने देवताओं के राजा इंद्र की सहायता की थी, इस दिन गणपति की भक्ति भाव से आराधना करने पर सभी विघ्न दूर हो जाते हैं ,और परिवार में सुख-शांति, सुख समृद्धि बनी रहती है,फरवरी 2025 में विनायक चतुर्थी का दिन भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए महत्वपूर्ण है, इस दिन उपवास और पूजा-अर्चना करके आप अपने जीवन में सुख, समृद्धि और धैर्य प्राप्त कर सकते हैं. शुभ मुहूर्त का ध्यान रखते हुए विधिवत पूजा करें और भगवान गणेश का अभय आशीर्वाद प्राप्त करें.

विनायक चतुर्थी 2025 पूजा अर्चना विधि

सुबह उठकर स्नान करें और साफ पीला वस्त्र धारण कर लें,इसके बाद पूजा घर को साफ करें. एक वेदी पर बप्पा की प्रतिमा स्थापित करें.बप्पा का पंचामृत, गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक करें लें फिर उन्हें पीले या लाल रंग के वस्त्र पहनाएं और उन्हें खूब सजाएं,कुमकुम का तिलक लगाएं. उनका प्रिय केले, मोदक और लड्डू का भोग लगाएं.साथ ही इसके बाद उनके सामने घी का दीपक जलाएं,और गुड़हल का माला अर्पित करें, साथ ही गणेश जी के विशेष मंत्रों, चालीसा और स्तोत्रों का पाठ अवश्य करें. आरती से पूजा को पूर्ण करें. भोजन, कपड़े और अन्य आवश्यकता की चीजों का दान करें. अगले दिन व्रत का पारण प्रसाद से ही करें.

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