Saturn Transit: जन्म के सूर्य से चतुर्थ, सप्तम या एकादश भाव में शनि का गोचर नौकरी में अस्थिरता, पिता के स्वास्थ्य संबंधी चिंता तथा पेट के रोगों का संकेत देता है. वहीं जन्म चंद्र से इन भावों में शनि का भ्रमण मानसिक तनाव, धन हानि और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ा सकता है. हालांकि यदि चंद्र लग्न आसुरी श्रेणी का हो, तो कुछ मामलों में आर्थिक लाभ और मिश्रित परिणाम भी प्राप्त हो सकते हैं.
मंगल और बुध पर शनि का प्रभाव
जब शनि जन्मस्थ मंगल अथवा उससे सप्तम भाव में आता है, तब शत्रुओं की सक्रियता बढ़ सकती है. भाई-बहनों से मतभेद, स्वभाव में कठोरता, रक्त विकार, मांसपेशियों में दर्द तथा बवासीर जैसी समस्याओं की आशंका रहती है. वहीं बुध से चतुर्थ, सप्तम या एकादश भाव में शनि का गोचर बुद्धि भ्रम, शिक्षा में बाधा, व्यापारिक नुकसान, संबंधियों से दूरी, मामा से विवाद और पाचन तंत्र संबंधी रोगों का कारण बन सकता है. यदि बुध मजबूत या विशेष योग वाला हो, तो आर्थिक लाभ भी संभव है.
गुरु, शुक्र और शनि पर गोचर के संकेत
जन्मस्थ गुरु से इन भावों में शनि का गोचर कर्मचारियों से विरोध, धन की कमी, संतान से मतभेद तथा यकृत संबंधी रोगों का संकेत देता है. शुक्र पर ऐसा गोचर दांपत्य जीवन में तनाव ला सकता है और यदि शुक्र पहले से पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो वैवाहिक संबंध टूटने तक की संभावना मानी जाती है. जन्मस्थ शनि से चतुर्थ, सप्तम या एकादश भाव में शनि का भ्रमण भूमि संबंधी नुकसान, पैरों में दर्द और जीवन में संघर्ष बढ़ा सकता है. हालांकि यदि लग्न और चंद्र लग्न आसुरी श्रेणी के हों, तो पद, प्रतिष्ठा और आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो सकते हैं.
