क्या होते हैं मारक ग्रह? जानें कुण्डली में इनके प्रभाव और बचाव के उपाय

Marak Grah: जब भी मारक ग्रहों के प्रभाव की बात की जाती है, तो सामान्यतः जातक के मन में यह नाम सुनकर ही भय उत्पन्न हो जाता है कि मारक का अर्थ है मृत्यु देने वाले या मृत्यु तुल्य गंभीर कष्ट देने वाले ग्रह. इसी कारण से जातक बिना फल का सही विचार किए विभिन्न प्रकार के उपाय करने लगते हैं, जिससे कई बार जीवन में समस्याएं और भी बढ़ जाती हैं. इसलिए आज हम इसी विषय पर चर्चा करेंगे कि वास्तव में कौन से ग्रह मारक होते हैं.

मारक ग्रहों की पहचान 

कुण्डली में बारह भाव होते हैं, जो जीवन के अलग-अलग चरणों से संबंधित होते हैं. इनमें से कुछ भाव और उनके स्वामी ग्रह जीवन में शुभता प्रदान करते हैं, जबकि कुछ भाव और उनके स्वामी ग्रह अशुभ फल भी देते हैं. लेकिन इन दोनों से बिल्कुल अलग प्रभाव देने वाले भाव होते हैं मारक भाव और उनके स्वामी ग्रह. यह प्रभाव उन भावों में स्थित ग्रहों पर भी लागू होता है.

हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में संबंधित भाव, उनके स्वामी ग्रह और उस भाव में स्थित ग्रहों को मारक दोष नहीं लगता.

सामान्यतः कुण्डली के 2, 3 और 7 भाव को मारक भाव माना जाता है तथा इनके स्वामी ग्रह और इन भावों में स्थित ग्रहों को मारकेश कहा जाता है. लेकिन यह तभी मारक भाव और मारकेश ग्रह होंगे जब वे लग्नेश के शत्रु ग्रह हों.

यदि लग्नेश के मित्र ग्रह हों, जैसे कन्या लग्न की कुण्डली में दूसरे भाव में तुला राशि हो, जो लग्नेश बुध के मित्र ग्रह की राशि है, तो ऐसी स्थिति में दूसरे भाव और उसके स्वामी ग्रह को मारक दोष नहीं लगता. लेकिन मंगल शत्रु ग्रह होकर तृतीय भाव का स्वामी होगा, जो कि मारक भाव है, इसलिए तृतीय भाव को मारक भाव और उसके स्वामी ग्रह मंगल को मारकेश कहा जाएगा. यदि इन भावों में राहु-केतु भी स्थित हों, तो वे भी मारकेश ग्रह की तरह फल देते हैं.

सभी लग्नों में मारक भाव और मारकेश ग्रह

  • मेष लग्न में शुक्र
  • वृषभ लग्न में मंगल
  • मिथुन लग्न में गुरु
  • कर्क लग्न में शनि
  • सिंह लग्न में शनि
  • कन्या लग्न में मंगल
  • तुला लग्न में मंगल
  • वृश्चिक लग्न में शुक्र
  • धनु लग्न में शनि
  • मकर लग्न में गुरु
  • कुंभ लग्न में गुरु
  • मीन लग्न में शुक्र

मारकेश ग्रहों के प्रभाव

मारकेश ग्रह अपनी दशा-अंतरदशा में किस प्रकार का प्रभाव देंगे या किस प्रकार का कष्ट देंगे, यह उस ग्रह के नैसर्गिक स्वभाव पर निर्भर करता है. उदाहरण के लिए गुरु ग्रह सामाजिक सम्मान का कारक होता है, लेकिन मारकेश होने पर यह व्यक्ति के सम्मान को किसी दंड या अपमान के माध्यम से प्रभावित कर सकता है.

आचार्य विनोद त्रिपाठी

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By Neha kumari

नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.

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