मृतक को श्मशान ले जाते समय ‘राम नाम सत्य है’ क्यों बोला जाता है? जानें रहस्य

Hindu Funeral Rituals: सनातन धर्म में किसी की मृत्यु के बाद जब शवयात्रा निकाली जाती है, तो पीछे चल रहे लोग “राम नाम सत्य है” का जाप करते हैं. क्या यह मात्र सदियों से चली आ रही परंपरा है या इसके पीछे कोई गहरा आध्यात्मिक और व्यावहारिक संदेश छिपा है? आइए, इस लेख के माध्यम से इन सभी सवालों का उत्तर जानते हैं.

Hindu Funeral Rituals: हिंदू धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक 16 संस्कारों का वर्णन है, जिसमें अंतिम संस्कार को ‘अंत्येष्टि संस्कार’ कहा जाता है. आपने अक्सर देखा होगा कि जब किसी मृत व्यक्ति को श्मशान घाट ले जाया जाता है, तो शवयात्रा में शामिल लोग लगातार “राम नाम सत्य है, सत्य बोलो गत है” का नारा लगाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक मृत व्यक्ति के सामने, जो अब कुछ सुन नहीं सकता, भगवान राम का नाम क्यों लिया जाता है? आइए जानते हैं इसके पीछे के मुख्य कारण:

यक्ष-युधिष्ठिर संवाद

शवयात्रा में जब लोग ‘राम नाम सत्य है’ कहते हैं, तो यह असल में मृत व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि पीछे चल रहे जीवित लोगों के लिए एक कड़वी चेतावनी होती है. महाभारत के वनपर्व में यक्ष और धर्मराज युधिष्ठिर के बीच एक प्रसिद्ध संवाद है, जहां युधिष्ठिर कहते हैं:

अहन्यहनि भूतानि गच्छंति यमममन्दिरम्। शेषा विभूतिमिच्छंति किमाश्चर्य मत: परम्।।

अर्थ: हर दिन आंखों के सामने अनगिनत प्राणी यमलोक (मृत्यु) को प्राप्त हो रहे हैं, लेकिन जो बचे हुए जीवित लोग हैं, वे फिर भी धन-संपत्ति, सांसारिक सुख और अमर रहने की इच्छा रखते हैं. भला इससे बड़ा आश्चर्य दुनिया में और क्या हो सकता है?

यह श्लोक याद दिलाता है कि इस नश्वर संसार में सब कुछ क्षणभंगुर और अस्थायी है. श्मशान जाते समय यह जाप इंसानों के भीतर के लोभ और मोह-माया के भ्रम को तोड़ता है और बताता है कि अंत में केवल परमात्मा (राम) का नाम ही साथ जाएगा.

शव को प्रेत-बाधाओं से बचाने का सुरक्षा कवच

अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर शास्त्र बहुत संवेदनशील हैं. रुद्रयामल तंत्र में एक बेहद महत्वपूर्ण आध्यात्मिक कारण बताया गया है:

शिवे शिवे न संचारों भवत् प्रेतस्य कस्यचित्। अतः दाहपर्यंतं राम नाम जपो वरम्।।

अर्थ: जब किसी जीव के प्राण निकल जाते हैं, तो वह शरीर खाली हो जाता है. उस खाली शरीर (शव) में कोई अन्य प्रेत आत्मा या नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश न कर सके, इसीलिए मुखाग्नि (अग्नि देने) तक निरंतर ‘राम’ नाम का जाप करना अनिवार्य है. राम नाम की यह ध्वनि एक ऐसा सुरक्षा कवच तैयार करती है, जो प्रेत-बाधाओं को दूर रखती है और मृतक की आत्मा को शांतिपूर्वक आगे बढ़ने का मार्ग देती है.

जीवित लोगों को मोह-माया से जगाना

गरुड़ पुराण के अनुसार, जब तक इंसान जीवित रहता है, वह सांसारिक सुखों, धन-दौलत, जमीन और ‘मेरा-तेरा’ के चक्कर में फंसा रहता है. जब किसी की शवयात्रा निकलती है और ‘राम नाम सत्य है’ का जाप होता है, तो यह वहां मौजूद लोगों को यह याद दिलाता है कि इस दुनिया में सब कुछ नश्वर (नष्ट होने वाला) है. केवल भगवान (राम) का नाम ही एकमात्र शाश्वत और परम सत्य है. शरीर मिट्टी है और अंत में मिट्टी में ही मिल जाना है.

आत्मा को शांति और सद्गति मिलना

माना जाता है कि मृत्यु के बाद भी कुछ समय तक जीव की आत्मा अपने परिवार के आसपास ही भटकती है. शवयात्रा के दौरान राम नाम का जाप सुनने से भटकती हुई आत्मा को शांति मिलती है. यह नाम उसके कानों में पड़ने से वह सांसारिक बंधनों को छोड़कर भगवान के चरणों की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित होती है, जिससे उसे सद्गति (मोक्ष) मिलता है.

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Published by: Neha Kumari

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