क्या है पीएम मोदी की 7 अपील का राज, जानिए विदेशी मुद्रा भंडार कब होता है प्रभावित?

PM Modi 7 appeals : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के बीच देश के नागरिकों से सात अपील की है. पीएम मोदी ने यह अपील हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान की है. पीएम मोदी के अपील के बाद कयासों का दौर जारी है और सभी यह समझना चाह रहे हैं कि आखिर इस अपील की वजह क्या है और इसका क्या होगा प्रभाव?

PM Modi 7 appeals : पीएम मोदी ने देश के नागरिकों से यह अपील की है कि वे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत रखने के लिए सात उपाय करें. इन सात उपायों में एक साल के लिए सोने की खरीद को टालना, एक साल के लिए विदेश यात्रा को टालना, खाद्य तेलों की खपत को घटाना, वर्क फ्राॅम होम के काॅन्सेंप्ट पर काम करना शामिल है.

पीएम मोदी के अपील के पीछे क्या है वजह?

पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर देश में विदेशी मुद्रा का भंडार कम ना हो, इसके लिए पीएम मोदी ने नागरिकों से सात अपील की है. देश में पेट्रोल-डीजल की खपत अगर इसी प्रकार बनी रही, तो सरकार को सप्लाई और डिमांड का गणित सही करना होगा. कच्चे तेल की कीमत वैश्विक बाजार में लगातार बढ़ रही है, लेकिन अभी तक सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमत में वृद्धि नहीं की है. इसका अर्थ यह है कि सरकार महंगे दर पर तेल खरीदकर उसे सस्ते में बेच रही है. अगर यही स्थिति रही तो सरकार का विदेशी मुद्रा भंडार खतरे में आ सकता है. पश्चिम एशिया संकट की वजह से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर असर पड़ा है. विश्व में भारत, सोने का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है. चूंकि भारत सोने की खरीद डाॅलर में करता है, इसलिए फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व पर इसका बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है. इसी वजह से प्रधानमंत्री ने यह अपील की है अगले एक साल तक सोना ना खरीदें.

विदेश मुद्रा भंडार और पीएम मोदी की अपील के बीच क्या लिंक है?

प्रधानमंत्री मोदी ने जिन चीजों का जिक्र अपने भाषण में किया है उन्हें भारत बड़ी मात्रा में इंपोर्ट करता है. इसका अर्थ यह हुआ कि इन चीजों के विश्व में हम सबसे बड़े खरीदार हैं.यहां समझने वाली बात यह है कि
जब भारतीय देश के बाहर से सामान खरीदते हैं, तो सौदा भारतीय रुपए में नहीं बल्कि डॉलर में होता है. डॉलर की खरीद के लिए भारतीय रुपए का प्रयोग होता है. इस स्थिति में रुपया कमजोर होता जाता है. इसे ऐसे समझा जा सकता है कि जब देश में डॉलर आता है, तो रुपया मजबूत होता है और जब देश में डॉलर की मांग बढ़ती है, तो रुपया कमजोर होता है. अगर ऐसी सिचुएशन लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसके दो असर होते हैं- एक, विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होता है और दूसरा, जब ऐसा हो रहा होता है, तो रुपया कमजोर होता है. यानी रुपए का मूल्य घटता जाता है.

विकसित भारत के सपने को पूरा करना चाहते हैं पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने जो अपील की है उसमें स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की बात है. पीएम मोदी यह चाहते हैं कि विदेशी निर्भरता को कम किया जाए और भारत को अपने उत्पादन तंत्र पर अधिक भरोसा करना होगा. इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, ऊर्जा और खाद्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भारत को संकट के समय अधिक सुरक्षित बनाएगी. वैश्विक संकट का असर सभी देशों पर पड़ता है, लेकिन घरेलू उद्योग अर्थव्यवस्था को स्थिर रखते हैं. लोगों को रोजगार उपलब्ध कराते हैं. हमें यह समझना होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सात अपीलें केवल तत्काल प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि भारत को दीर्घकालिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की रणनीति का हिस्सा हैं, जिसमें जनभागीदारी की मांग वो कर रहे हैं.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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