Pawan Kalyan in Tirupati Laddu Controversy: क्या पवन कल्याण दक्षिण में हिंदुत्व के नए सियासी धर्मयोद्धा होंगे?

पवन कल्याण का रुख भाजपा की रणनीति है या पवन कल्याण की अपनी पहल?

Pawan Kalyan in Tirupati Laddu Controversy: क्या कहें? तिरुपति मंदिर के लड्डू में जानवरों की चर्बी पाए जाने के खुलासे के बाद आंध्र प्रदेश के उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण ने हिंदुओं की महफिल लूट ली है या उनकी आस्था को थोड़ा ज्यादा ही आघात पहुंचा है? तिरुपति मंदिर के प्रसाद के अपवित्र होने का राजफाश कर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू सरकारी प्रक्रिया के जरिये पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी को सवालों के घेरे में लाकर उनसे अपना पुराना हिसाब-किताब बराबर करने में लग गए हैं. 

अब आंध्र प्रदेश की सियासत में हिंदुत्व के धर्मयोद्धा का मोर्चा पवन कल्याण ने थाम लिया है. तिरुपति मंदिर के प्रसाद में चर्बी का मिलावट पाए जाने के बाद देशभर के हिंदुओं की आहत भावनाओं को भुनाने के लिए पहले तो उन्होंने प्रायश्चित किया और अब तो आंध्रप्रदेश में हिंदुओं के सबसे बड़े प्रवक्ता की भूमिका में नजर आने लगे हैं. अभिनेता से नेता बने पवन कल्याण की नई अदा जनता को भी खूब भा रही है. पवन कल्याण की इस भूमिका के लपेटे में उनके पुराने अभिनेता साथी भी आ रहे हैं. अभिनेता प्रकाश राज के हिंदुओं की आस्था से संबंधित एक सोशल मीडिया पोस्ट पर  उन्होंने जमकर लताड़ लगाई है. इसके साथ ही यह भी चुनौती दी है कि क्या वे दूसरे धर्मों के बारे में ऐसा बोल सकते हैं? पवन कल्याण ने राष्ट्रीय स्तर पर सनातन धर्म रक्षा बोर्ड बनाने की मांग भी की है.  

Pawan Kalyan in Tirupati Laddu Controversy: क्या आंध्र प्रदेश में हिंदुत्व की राजनीति का स्पेस खाली है? 

आंध्र प्रदेश की 175 सदस्यीय विधानसभा में  पवन कल्याण की जनसेना पार्टी के 21 विधायक हैं. यानी संख्याबल के लिहाज से पवन कल्याण की विधानसभा में मजबूत स्थिति है. भाजपा लाख कोशिशों के बाद भी आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनाव में हिंदुत्व के एजेंडे को मुख्यधारा में नहीं ला पाई है. जगनमोहन रेड्डी के पिता वाईएसआर रेड्डी के मुख्यमंत्रित्व काल में भी तिरुपति मंदिर से जुड़े कई मुद्दे आए पर भाजपा उन्हें राजनीतिक रूप से नहीं भुना पाई. ऐसे में पवन कल्याण के लिए खुला मैदान है. शायद भाजपा नेतृत्व भी पवन कल्याण को हिंदुत्व की सियासत के नए योद्धा के रूप में देखना चाहती है.  

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Author: Mukesh Balyogi

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