कपड़े, पढ़ाई और घर से बाहर निकलने पर पाबंदी, अफगानिस्तान में महिलाओं के लिए कितनी मुश्किल है जिंदगी?

अफगानिस्तान में महिलाओं की पढ़ाई, नौकरी, आवाजाही और पहनावे तक पर पाबंदियां हैं. तालिबान शासन के पांच साल में महिलाओं की रोजमर्रा की जिंदगी किस तरह बदल गई है और उनके लिए आम अधिकार भी क्यों मुश्किल होते जा रहे हैं? इस लेख में जानिए रिपोर्ट क्या कहती है और इसका क्या असर हो सकता है.

अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी को पांच साल हो चुके हैं। लेकिन इन पांच सालों में महिलाओं और लड़कियों की मुश्किलें काफी बढ़ी हैं. तालिबान ने महिलाओं की पढ़ाई और नौकरी से लेकर इलाज, घर से बाहर निकलने और सार्वजनिक जगहों पर जाने तक उनकी आजादी पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी गई हैं।

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, 2021 के बाद तालिबान ने महिलाओं और लड़कियों को प्रभावित करने वाले 100 से ज्यादा प्रतिबंध लगाए हैं. अगस्त 2026 में संयुक्त राष्ट्र ने अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति को दुनिया के सबसे गंभीर महिला अधिकार संकटों में से एक बताया.

छठी कक्षा के बाद स्कूल का रास्ता बंद

  • तालिबान के सबसे बड़े फैसलों में लड़कियों की माध्यमिक शिक्षा पर रोक शामिल है. सितंबर 2021 से लड़कियों को छठी कक्षा के बाद स्कूल जाने की अनुमति नहीं है. 2022 के अंत में महिलाओं के लिए विश्वविद्यालयों के दरवाजे भी बंद कर दिए गए.
  • इसका असर अब एक पूरी पीढ़ी पर दिखाई दे रहा है. अगस्त 2026 तक करीब 24 लाख अफगान लड़कियां माध्यमिक शिक्षा से बाहर हैं.
अफगानिस्तान दुनिया का एकमात्र देश है जहां लड़कियों और महिलाओं को माध्यमिक और उच्च शिक्षा से औपचारिक रूप से बाहर रखा गया है.
  • शिक्षा पर रोक सिर्फ क्लासरूम तक सीमित समस्या नहीं है. यूनिसेफ के अनुसार, अगर मौजूदा नीतियां जारी रहीं तो 2030 तक अफगानिस्तान को करीब 20 हजार महिला शिक्षकों और 5,400 महिला स्वास्थ्य कर्मियों की कमी का सामना करना पड़ सकता है.

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महिलाओं के लिए घट रहे रोजगार के मौके

  • महिलाओं के लिए रोजगार के रास्ते भी बड़े पैमाने पर बंद किए गए हैं. सरकारी नौकरियों में महिला कर्मचारियों की भागीदारी घटी है, जबकि कई निजी क्षेत्रों और संस्थानों में भी महिलाओं के काम करने पर प्रतिबंध लगाए गए.
  • दिसंबर 2022 में महिलाओं के गैर-सरकारी संगठनों यानी एनजीओ में काम करने पर रोक लगाई गई. इसके बाद संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं में काम करने वाली अफगान महिलाओं पर भी प्रतिबंध लगाया गया.
  • यूनिसेफ के 2026 के विश्लेषण के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच सिविल सर्विस में महिलाओं की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत से घटकर 17.7 प्रतिशत रह गई. महिलाओं की शिक्षा और रोजगार पर लगी पाबंदियां अफगानिस्तान को हर साल करीब 8.4 करोड़ डॉलर के आर्थिक उत्पादन से वंचित कर रही हैं.

पब्लिक जगहों पर महिलाओं पर बढ़ी पाबंदी

तालिबान की नीतियों का एक अहम हिस्सा महिलाओं की सार्वजनिक मौजूदगी को सीमित करना है.

  • महिलाओं को पार्क, जिम, स्पोर्ट्स क्लब और कुछ अन्य सार्वजनिक जगहों से बाहर रखा गया है.
  • लंबी दूरी की यात्रा के मामले में भी महिला के साथ पुरुष रिश्तेदार यानी मह्रम की शर्त लागू की गई.
  • कई इलाकों में महिलाओं के अकेले सार्वजनिक जगहों पर जाने को लेकर भी कड़े नियम लागू किए जाते हैं.

संयुक्त राष्ट्र महिला संस्था के अनुसार, इन पाबंदियों ने महिलाओं की सेवाओं, रोजगार और सार्वजनिक जीवन तक पहुंच को गंभीर रूप से प्रभावित किया है.

पहनावे से लेकर आवाज तक पर शासन का नियंत्रण

महिलाओं के पहनावे को लेकर भी तालिबान ने सख्त नियम बनाए हैं. 2022 में महिलाओं के लिए अनिवार्य हिजाब से जुड़े आदेश आए और बाद में 2024 के तथाकथित प्रोपेगेशन ऑफ वर्च्यू एंड प्रिवेंशन ऑफ वाइस लॉ ने महिलाओं की सार्वजनिक मौजूदगी और अभिव्यक्ति पर नियंत्रण को और मजबूत किया.

इस कानून के तहत महिलाओं की आवाज और सार्वजनिक व्यवहार तक को नियंत्रित करने वाले प्रावधान सामने आए. यानी मामला सिर्फ कपड़े पहनने तक नहीं रहा, बल्कि महिला सार्वजनिक जगह पर कैसे दिखाई दे और कैसे व्यवहार करें, यह भी निगरानी के दायरे में आ गया.

स्वास्थ्य व्यवस्था पर रहा गंभीर असर

  • महिलाओं की शिक्षा और रोजगार पर रोक का असर स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी पड़ रहा है.
  • अफगान में कई जगह पुरुष स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा महिलाओं का इलाज करना सामाजिक और धार्मिक प्रतिबंधों से प्रभावित होता है. ऐसे में महिला डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी सीधे महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित कर सकती है.
  • महिला चिकित्सा शिक्षा पर लगाए गए प्रतिबंध ने इस समस्या को और गंभीर किया है. संयुक्त राष्ट्र महिला संस्था ने चेतावनी दी है कि चिकित्सा शिक्षा और महिला स्वास्थ्य कर्मियों पर पाबंदियां महिलाओं के स्वास्थ्य तक पहुंच को कमजोर कर रही हैं.

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शासन में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी लगभग खत्म

तालिबान शासन में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी लगभग खत्म हो गई है. राष्ट्रीय स्तर से लेकर स्थानीय प्रशासन तक निर्णय लेने वाली संस्थाओं में महिलाओं की मौजूदगी बेहद सीमित है.

यूनाइटेड नेशंस वुमन के अनुसार, तालिबान के मौजूदा कैबिनेट में कोई महिला नहीं है और महिलाओं की आवाज को नीति निर्माण में शामिल करने के लिए प्रभावी संस्थागत व्यवस्था भी मौजूद नहीं है.

भविष्य में दिखेगा पाबंदियों का असर

  • इन पाबंदियों का सबसे बड़ा खतरा यह है कि इसका असर आने वाले वर्षों तक रहेगा.
  • जब लड़कियां स्कूल नहीं जाएंगी, तो उनके लिए उच्च शिक्षा और पेशेवर प्रशिक्षण का रास्ता बंद होगा.
  • इससे डॉक्टर, शिक्षक, इंजीनियर और दूसरे पेशेवर क्षेत्रों में महिलाओं की अगली पीढ़ी तैयार नहीं हो पाएगी.

यूनिसेफ का अनुमान है कि अगर मौजूदा प्रतिबंध जारी रहे तो 2030 तक 20 लाख से ज्यादा लड़कियां प्राथमिक शिक्षा के आगे पढ़ाई से वंचित हो सकती हैं. आर्थिक नुकसान भी लगातार बढ़ेगा.

प्रतिबंध के बाद भी आवाज उठा रही महिलाएं

  • तालिबान के महिला संबंधी नियमों को अलग-अलग प्रतिबंधों के रूप में देखना अधूरी तस्वीर होगी.
  • शिक्षा पर रोक, रोजगार की सीमाएं, आवाजाही पर नियंत्रण, सार्वजनिक जगहों से बहिष्कार, स्वास्थ्य सेवाओं पर असर और राजनीतिक भागीदारी का खत्म होना, ये सभी मिलकर महिलाओं की स्वतंत्रता को सीमित करते हैं.
  • इसके बावजूद अफगान महिलाएं पूरी तरह खामोश नहीं हुई हैं. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक वे घर-आधारित कारोबार, सामुदायिक शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और दूसरे तरीकों से अपनी भूमिका बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं.
  • लेकिन पांच साल बाद पुराना सवाल बना हुआ है, क्या अफगानिस्तान अपनी आधी आबादी को शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन से बाहर रखकर आगे बढ़ सकता है?

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By गौतम कुमार

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