खेती पर जोर

सरकार द्वारा कृषि से संबंधित शिक्षा और शोध पर समुचित ध्यान दिया जा रहा है. प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं इन प्रयासों की समीक्षा की है.

देश में आधे से अधिक रोजगार और सकल घरेलू उत्पादन में लगभग 18 फीसदी के योगदान के साथ खेती और उससे जुड़े कामकाज हमारी आर्थिकी के आधार हैं. दुनिया में सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान कृषि क्षेत्र का है. कोरोना संकट के मौजूदा दौर में जब निराशा का माहौल है, तब किसानों की वजह से ही देश का आत्मविश्वास मजबूत बना हुआ है. फिर भी हमारे किसान लंबे समय से सीमित संसाधन, कम उपज और बाजार से जुड़ाव के अभाव जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं. उन्हें अक्सर प्राकृतिक आपदाओं का भी सामना करना पड़ता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार पिछले कुछ सालों से किसानों की आमदनी बढ़ाने और समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिशों में लगी है. इस प्रक्रिया में कृषि से संबंधित शिक्षा और शोध पर भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है. प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं इन प्रयासों की समीक्षा की है और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ त्रिलोचन महापात्रा ने उन्हें अब तक की प्रगति से अवगत कराया है. साल 2014 से विभिन्न फसलों की लगभग तीन हजार नयी प्रजातियों को विकसित किया गया है.

प्रधानमंत्री ने नये उद्यमों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया है, ताकि नवोन्मेष हो सके. इसके साथ ही तकनीक के अधिकाधिक इस्तेमाल की भी जरूरत को रेखांकित किया है. कम उपज के साथ जलवायु परिवर्तन की भी बड़ी चुनौती हमारे किसानों के सामने है. नयी प्रजातियों के विकास में इस पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और आगे भी इसे जारी रखा जाना चाहिए. जलवायु परिवर्तन तथा धरती के बढ़ते तापमान के कारण आपदाओं की बारंबारता बढ़ रही है और इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है. एक मसला उपज के पर्याप्त पौष्टिक होने का भी है.

कुपोषण देश की बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में एक है. कृषि अनुसंधान में लगे संस्थानों और वैज्ञानिकों की कोशिश है कि नयी प्रजातियों में विटामिनों एवं खनिज तत्वों की भरपूर मात्रा हो ताकि कुपोषण मुक्त भारत के लक्ष्य की प्राप्ति संभव हो सके. जीवन शैली में नकारात्मक बदलाव तथा खेती में रासायनिक उत्पादों के बढ़ते उपयोग ने भी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. इस संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी का यह सुझाव बहुत महत्वपूर्ण है कि जैविक व प्राकृतिक खेती को अपनाया जाये.

इस संबंध में भी शोध को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि ऐसी खेती से किसानों को समुचित आमदनी हो सके और उनका खर्च भी न बढ़े. हालांकि सरकार ने सिंचाई व्यवस्था की बेहतरी को अपनी प्राथमिकता में शामिल किया है, लेकिन इसके साथ कम पानी के उपयोग से खेती करने की दिशा में भी काम किया जाना चाहिए. पशुओं के चारे पर भी ध्यान देने का आह्वान प्रधानमंत्री ने किया है. सरकार की किसान कल्याण योजनाओं के साथ यदि कृषि अनुसंधान भी सक्षम हो, तो न केवल किसानों को लाभ होगा, बल्कि देश के विकास को भी ऊर्जा मिलेगी.

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