अहम नौसैनिक अभ्यास

भारत की रणनीतिक तत्परता से क्वाड के उद्देश्यों के साथ विभिन्न देशों के जुड़ने की संभावना को विस्तार मिला है.

बंगाल की खाड़ी में फ्रांस के नौसैनिक अभ्यास में क्वाड समूह- भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया एवं जापान का शामिल होना हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती साझेदारी को इंगित करता है. लगभग डेढ़ दशकों से एक विचार के रूप में चर्चा का विषय बना क्वाड कुछ दिन पहले चार देशों के प्रमुखों की शिखर बैठक के साथ साकार हुआ है. जहां वह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की कोशिशों से संभव हो सकी थी, वहीं फ्रांसीसी अभ्यास में क्वाड सदस्य भारत की पहल पर सहभागिता कर रहे हैं.

भारत की रणनीतिक तत्परता से क्वाड के उद्देश्यों के साथ विभिन्न देशों के जुड़ने की संभावना को विस्तार मिला है. समूह के सदस्यों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बार-बार आश्वस्त किया है कि क्वाड चार देशों का विशिष्ट संगठन नहीं है तथा विभिन्न वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए व्यापक सहकार के साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में व्यापारिक एवं सामरिक सुरक्षा सुनिश्चित करना उनका प्राथमिक उद्देश्य है.

शीर्ष बैठक में चारों नेताओं ने कोरोना महामारी का मुकाबला करने में सहयोग के साथ जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए वैश्विक प्रयास तेज करने पर जोर दिया था. स्वाभाविक रूप से चीन ने पहले शीर्ष बैठक और अब साझा नौसैनिक अभ्यास का विरोध किया है क्योंकि वह आर्थिक, व्यापारिक और सामरिक शक्ति के सहारे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में वर्चस्व स्थापित करने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रहा है. उसके इस पैंतरे को क्वाड की पहल से बड़ा झटका मिल रहा है.

वर्तमान नौसैनिक अभ्यास में फ्रांस की अग्रणी भूमिका से क्वाड के विस्तार का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जिसका संकेत शीर्ष बैठक में किया गया था. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में फ्रांस की रुचि की वजह यह है कि इस इलाके में उसके अनेक क्षेत्र और 93 प्रतिशत विशेष आर्थिक अंचल हैं, जहां 16 लाख फ्रांसीसी नागरिक बसते हैं. इस क्षेत्र के देशों में भी दो लाख से अधिक फ्रांसीसी रहते हैं. फ्रांस से क्वाड देशों के अच्छे संबंध भी इस सहभागिता के उल्लेखनीय आधार हैं.

बीते कुछ सालों से भारत और फ्रांस के बीच विभिन्न द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मसलों पर निकटता बढ़ी है. यह नौसैनिक अभियान उस निकटता का बड़ा संकेत है. क्वाड देशों के आपसी सहकार और फ्रांस जैसे देशों के साथ आने को केवल सामरिक स्तर तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए. चीन की आक्रामकता से नियम-आधारित बहुपक्षीय विश्व व्यवस्था को सुरक्षित करने के अलावा ये देश वैश्विक महामारी से निपटने में भी सहयोग कर रहे हैं.

अमेरिका और जापान के तकनीकी और वित्तीय सहयोग से भारत बड़े पैमाने पर टीके के निर्माण की योजना बना रहा है, जिसे ऑस्ट्रेलियाई परिवहन व्यवस्था के जरिये दक्षिण-पूर्वी देशों को उपलब्ध कराया जायेगा. फ्रांस के साथ से इस फल का विस्तार अफ्रीका तक किया जा सकता है. भारत और फ्रांस अंतरराष्ट्रीय सौर संगठन के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में जुटे हुए हैं. ऐसे में क्वाड का विस्तार वैश्विक सहकार का विस्तार है.

Posted By : Sameer Oraon

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >