नये संकल्प के साथ आगे बढ़ने का अवसर

हमारी जो गति कम हो गयी थी, चाहे वह विकास की गति हो, समरसता की गति हो, हर क्षेत्र में नये विश्वास और संकल्प के साथ इस गणतंत्र दिवस पर आगे बढ़ेंगे.

By प्रो नागेश्वर | January 27, 2021 2:34 PM

नये संकल्प के साथ आगे बढ़ने का अवसर

प्रो नागेश्वर राव

कुलपति, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय

यह गणतंत्र दिवस हमारे लिए आशा की किरण लेकर आया है. यदि हम उच्च शिक्षा की बात करें, आज हमारा देश बड़ी ऊंचाइयों पर है. हमारे पास कई आइआइटी, एनआइटी, पारंपरिक विश्वविद्यालय हैं. हम इन संस्थानों का रैंकिंग सूचकांक बना रहे हैं. दूरस्थ शिक्षा के 15 विश्वविद्यालय हैं. इनके अलावा डेढ़ सौ से अधिक ऐसी संस्थाएं हैं, जहां दूरस्थ शिक्षा के कार्यक्रम संचालित किये जाते हैं. भारत ने मेडिकल और तकनीकी शिक्षा में भी उल्लेखनीय प्रगति की है. विभिन्न क्षेत्रों में ठोस योगदान रहा है तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाती रही है. हम यह कह सकते हैं कि कुछ क्षेत्रों में तो हम बहुत ही आगे हैं.

नयी शिक्षा नीति का आना एक महत्वपूर्ण परिघटना है. इसके तहत पहली बार सकल नामांकन अनुपात को 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए हमें उच्च शिक्षा की अधोसंरचना को तैयार करना पड़ेगा और इसमें निश्चित रूप से दूरस्थ शिक्षा की बड़ी भूमिका रहेगी. पारंपरिक विश्वविद्यालयों में हमें अधोसंरचना पर बहुत खर्च करना पड़ता है, पर दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से बड़ी संख्या में छात्रों के पास पहुंचना अपेक्षाकृत कम खर्चीला और आसान है.

इसलिए सरकारी संसाधनों के समुचित उपयोग के लिए दूरस्थ शिक्षा, विशेषकर ऑनलाइन शिक्षा, कारगर सिद्ध हो सकती है. साल 2020 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा के बारे में एक संशोधित विनियम बनाया है. इसके तहत दोनों ही तरह के संस्थानों को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है.

पिछले वर्ष बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सौ नये ऑनलाइन संस्थानों के संचालन की अनुमति दी जायेगी. इस दिशा में देशभर में काम प्रगति पर है और यूजीसी इसमें सक्रिय योगदान दे रहा है. आज लगभग 15-20 ऐसी संस्थाएं आ गयी हैं, जो ऑनलाइन शिक्षा दे रही हैं. इसके अलावा शिक्षा मंत्रालय का ‘स्वयं’ नामक मंच है, जिसमें करीब दो करोड़ छात्रों ने अपना पंजीयन कराया है.

इसके तहत आप पूरा पाठ्यक्रम पढ़ने की जगह अपनी रूचि से अलग-अलग कोर्स पढ़ सकते हैं. यदि कोई एक कोर्स कृषि का, एक भौतिकी का और एक हिंदी का पढ़ना चाहता है, तो ऐसा पारंपरिक विश्वविद्यालयों में संभव नहीं है. लेकिन ‘स्वयं’ पर इन कोर्स को एकसाथ पढ़ा जा सकता है और इनके प्राप्तांकों का उपयोग किसी भी विश्वविद्यालय में किया जा सकता है. उन लोगों के यह बड़ी देन है, जो लंबे समय से शिक्षा की लौ से वंचित रहे हैं.

शिक्षा के तीन आयाम होते हैं- ज्ञान, कौशल और मूल्य. अभी तक जो भी पाठ्यक्रम चलाये गये, उनमें मुख्य जोर ज्ञान पर रहा है. पांच-दस सवाल रख लिये जाते हैं और परीक्षा में उनके जवाब के आधार पर अंक मिलते हैं. कौशल अलग बात है. जो भी व्यक्ति काम करता है, वह अपने हुनर से करता है. इसे बढ़ावा देने के लिए लगभग चार साल पहले सरकार ने कौशल मंत्रालय का गठन किया था. इसके तहत विभिन्न शैक्षणिक स्तरों पर कौशल प्रशिक्षण की व्यापक योजना तैयार हुई थी. हाल ही में खबर आयी है कि वाराणसी में एक कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना होगी.

हमें ज्ञान के साथ दक्षता को भी आगे बढ़ाना होगा. इनका जब समुचित समन्वय होगा, तभी हमारे छात्रों को रोजगार मिलने की संभावनाएं रहेंगी. इसी दिशा में नयी शिक्षा नीति अग्रसर है. इस नीति में एक और महत्वपूर्ण तत्व है. इसमें इंटर डिसिप्लीनरी एप्रोच रखा गया गया है. अभी तक यह होता आया है कि अगर आपने बारहवीं में तय कर लिया कि आपको कृषि या कला या विज्ञान पढ़ना है, तो आपको ऊपरी कक्षाओं में भी यही विषय पढ़ना होगा. नयी नीति में प्रावधान है कि छात्र दूसरे विषयों के पाठयक्रम भी पढ़ सकते हैं यानी एक ही विषय में रहने की बाध्यता नहीं होगी.

उदाहरण के लिए, अब हिंदी का एक छात्र वाणिज्य का भी पाठ्यक्रम पढ़ सकता है, विज्ञान का भी एक विषय चुन सकता है. ‘स्वयं’ के माध्यम में यह सुविधा पहले से ही है. मल्टी डिसिप्लीनरी एप्रोच से व्यक्ति की मस्तिष्क की क्षमता भी बढ़ती है और उसकी कुशलता का भी विकास होता है.

बीते आठ-दस महीने हम लोग काफी कष्ट में थे. महामारी की वजह से निराशा का वातावरण था. रोजगार, शिक्षा, अर्थव्यवस्था आदि सभी क्षेत्रों में देश परेशानियों का सामना कर रहा था. इस गणतंत्र दिवस पर हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि हमारे पास वैक्सीन आ गयी है, जो सफल है और लोगों को उसका फायदा मिलना शुरू हो चुका है.

महामारी के कारण जो मंदी भारत की आर्थिकी में फैली हुई थी, उसका असर भी धीरे-धीरे कम हो रहा है. पिछले वर्ष शिक्षा की स्थिति भी अच्छी नहीं थी, पर अब वहां भी स्थिति सामान्य होने लगी है और कक्षाओं एवं परीक्षाओं का सिलसिला शुरू हो रहा है.

नयी शिक्षा नीति को लागू करने में भी बाधाएं थी, जो अब दूर हो रही हैं. अब हम आश्वस्त हैं कि इसे बेहतर ढंग से कार्यान्वित कर सकेंगे. हमारी जो गति कम हो गयी थी, चाहे वह विकास की गति हो, समरसता की गति हो, हर क्षेत्र में नये विश्वास और संकल्प के साथ इस गणतंत्र दिवस पर आगे बढ़ेंगे.

Posted By : Sameer Oraon

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