नवरात्र के बहाने स्त्री-सुरक्षा का संकल्प

भारत में घटता लिंगानुपात चिंता का सबब बन गया है. भारत ही नहीं, दुनिया के अधिकांश देशों में यह समस्या गंभीर होती जा रही है. किसी देश का लिंगानुपात उस देश की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का महत्वपूर्ण संकेतक होता है. इस दृष्टि से प्रति हजार पुरुषों के बरक्स 940 स्त्रियों के साथ भारत की स्थिति अच्छी […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | October 16, 2015 1:03 AM
भारत में घटता लिंगानुपात चिंता का सबब बन गया है. भारत ही नहीं, दुनिया के अधिकांश देशों में यह समस्या गंभीर होती जा रही है. किसी देश का लिंगानुपात उस देश की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का महत्वपूर्ण संकेतक होता है. इस दृष्टि से प्रति हजार पुरुषों के बरक्स 940 स्त्रियों के साथ भारत की स्थिति अच्छी नहीं कही जा सकती है.
पितृसत्तात्मक समाज में अत्यधिक पुत्र मोह और कुकुरमुत्ते की तरह खुले क्लिनिकों में भ्रूण की चोरी-छिपे तथा अवैध जांच के बाद असंख्य बच्चियां अपनी मां के उदर में ही दम तोड़ देती हैं.
दुर्भाग्य यह भी है कि नारी रूपी देवी का सम्मान करनेवाले इस देश में आज भ्रूण हत्या, ऑनर किलिंग, घरेलू हिंसा और दुष्कर्म जैसी घिनौनी घटनाएं होती हैं. आखिर हम स्त्रियों को उनके हक से वंचित क्यों कर रहे हैं? स्त्रियों को मौका दिया गया, तो वह सबल, शिक्षित और आत्मनिर्भर होकर पुरुषों के साथ कदम से कदम मिला रही हैं. अभी हाल में ही वायु सेना दिवस पर लड़ाकू पायलटों के रूप में महिलाओं की भर्ती करने का फैसला भी उनकी क्षमता का परिचय दे रहा है. इससे पूर्व भी गणतंत्र दिवस के अवसर पर विंग कमांडर पूजा ठाकुर ने अमेरिकी राष्ट्रपति को दिये गये गार्ड ऑफ ऑनर की अगुवाई कर इतिहास रच दिया. खेल, विज्ञान, राजनीति, पत्रकारिता आदि क्षेत्रों में महिलाएं सफलता का झंडा फहरा रही हैं.
जरूरत है उन्हें घर-समाज से इस दिशा में पूर्ण प्रोत्साहन की. स्त्रियां समाज की अभिन्न अंग हैं. तमाम साहित्य, सिनेमा व कला भी बतलाते हैं कि नारी के बिना पुरुषों का कोई अस्तित्व ही नहीं है. नवरात्र के इस पावन अवसर पर हम स्त्रियों की सुरक्षा, सम्मान व सहयोग का संकल्प ले सकते हैं.
– सुधीर कुमार, राजाभीठा, गोड्डा