सरकारी शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड लागू करने की चर्चा और आदेश शिक्षा जगत में जोर-शोर से शुरू हो गयी है. प्राचीन काल, मध्यकाल, अंगरेजों के समय या स्वतंत्र भारत में भी कभी शिक्षकों को ड्रेस कोड की आवश्यकता नहीं पड़ी.
भारत के इक्का-दुक्का राज्यों को छोड़ कहीं भी ड्रेस कोड लागू नहीं है. ज्यादातर यूनिफॉर्म की आवश्यकता कंपनी, फॉर्म या ऑफिस में पड़ती है, जहां ड्रेस संस्थान की ओर से कर्मचारियों को मुहैया करायी जाती है. शिक्षा का संबंध मानसिक वृद्धि और क्षमता से होता है. इसे किसी बाह्य आवरण में बांधने की जरूरत नहीं होती है.
सलीके और शालीनता से, विविधता भरे वस्त्र धारण कर कोई भी शिक्षक अपने कर्तव्य का पालन पूरी ईमानदारी और मेहनत से कर सकता है. यह सोच तो बिल्कुल निराधार है कि ड्रेस कोड लागू कर देने से शिक्षकों के व्यक्तित्व में सुधार कर देंगे.
अंजली कुजूर, रांची
