भारत में ही योग का विरोध क्यों?

पूरी दुनिया में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की तैयारी जोर-शोर से की जा रही है. दुनिया भर के 150 से अधिक देश इसे मनाने को लेकर उत्सुक हैं. इसमें कई मुस्लिम देश भी शामिल हैं. लेकिन आश्चर्यजनक है कि जहां पूरी दुनिया में योग को लेकर उत्साह है, वहीं हमारे देश में […]

पूरी दुनिया में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की तैयारी जोर-शोर से की जा रही है. दुनिया भर के 150 से अधिक देश इसे मनाने को लेकर उत्सुक हैं. इसमें कई मुस्लिम देश भी शामिल हैं. लेकिन आश्चर्यजनक है कि जहां पूरी दुनिया में योग को लेकर उत्साह है, वहीं हमारे देश में धर्मनिरपेक्षता के नाम पर अपनी सियासी रोटियां सेंकनेवाले कुछ छद्म-धर्मनिरपेक्ष और कुछ मुस्लिम नेता लोगों को यह कह कर बरगलाने में लगे हैं कि ये उनके धर्म और संप्रदाय के खिलाफ है.
यह अत्यंत हास्यास्पद और दुर्भाग्यपूर्ण प्रतीत होता है. इस योग को स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविंद, स्वामी दयानंद सरीखे महापुरुषों ने जीवन का आधार माना, तो दूसरी ओर योग के प्रति संकीर्ण मानसिकता रखनेवाले ये बुद्धिजीवी जो योग को ही सांप्रदायिक बता रहे हैं. अब इनको कौन समझाये?
विवेकानंद विमल, पाथरोल, मुधुपुर

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