असुरक्षित होते अपार्टमेंट के फ्लैट

रांची में रविवार को एक ही अपार्टमेंट के दो फ्लैट में डकैती हुई और एक में चोरी. डकैत लगभग तीस लाख के जेवर और नकदी ले गये. डकैतों ने गार्ड को कब्जा में लेकर दरवाजा तोड़ कर यह डकैती की. पड़ोसियों को इसकी भनक तक नहीं लगी. यह घटना बताती है कि अपराधियों का मनोबल […]

रांची में रविवार को एक ही अपार्टमेंट के दो फ्लैट में डकैती हुई और एक में चोरी. डकैत लगभग तीस लाख के जेवर और नकदी ले गये. डकैतों ने गार्ड को कब्जा में लेकर दरवाजा तोड़ कर यह डकैती की. पड़ोसियों को इसकी भनक तक नहीं लगी. यह घटना बताती है कि अपराधियों का मनोबल कितना बढ़ा हुआ है.
अब बड़ी आबादी फ्लैटों में रहती है लेकिन इन फ्लैटों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं रहती. हां, कुछ बड़े अपार्टमेंट में ऐसी सुविधा रहती है कि आसानी से डकैत अंदर नहीं जा सकते. राजधानी के अधिकांश अपार्टमेंट में सुरक्षा की जिम्मेवारी एक या दो गार्ड के भरोसे रहती है. ये गेट ख़ोल और बंद तो कर सकते हैं लेकिन अपराधियों का मुकाबला करने के लिए न तो प्रशिक्षित हैं और न ही इनके पास साधन है.
इसी का फायदा अपराधी उठाते रहे हैं. हाल के दिनों में फ्लैट में चोरी और डकैती की घटनाएं बढ़ी हैं. अपराधी पकड़े भी नहीं जाते. दरअसल अपार्टमेंट में किसी अपरिचित के प्रवेश को रोकने या जांचने के लिए पूरी व्यवस्था नहीं होती. अपवाद को छोड़ दें तो अधिकांश अपार्टमेंट में सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगे हैं. न ही इंटरकॉम से संबंधित फ्लैट से गार्ड के संपर्क करने की सुविधा है. ऐसे में कोई भी अपरिचित कोई भी बहाना बना कर अपार्टमेंट में घुस जाता है और ऐसी घटनाओं को अंजाम देता है.
ऐसी घटनाओं पर अंकुश तभी लगाया जा सकता है जब वहां पर्याप्त सुरक्षा हो. नयी तकनीक का इस्तेमाल किया जाये. साथ ही प्रशिक्षित गार्ड यह जिम्मेवारी संभाले. सीसीटीवी कैमरे के नहीं रहने के कारण कोई सबूत भी नहीं मिल पाता. इससे पुलिस अपराधियों तक नहीं पहुंच पाती.
अब तो राजधानी में पीसीआर के तेज रफ्तार से चलनेवाले वाहन हैं और यह दावा किया जाता है कि घटना की जानकारी मिलने पर संबंधित थाना की पुलिस के पहुंचने के पहुंचने के पहले ही पीसीआर वाहन पहुंच जाता है. लेकिन यह दावा अभी दावा ही है.
समय आ गया है जब ऐसे वाहन अपनी क्षमता दिखायें और अपराधियों को पकड़े. तभी अपराधियों के मन में डर बैठेगा. इन डकैतियों ने पुलिस को चुनौती दी है और अब यह पुलिस पर निर्भर करता है कि वह अपराधियों को पकड़ कर साख बचा पाती है या नहीं.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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