मैंने प्रभात खबर के पाठक मत में पालूराम हेंब्रम जी के खास पत्र को पढ़ा. इसका विषय-वस्तु ‘हम सबको सहयोग करना होगा’ था. इसे पूरा पढ़ने पर मैं उनके विचार से ओत-प्रोत हो गया.
उनके जैसा विचार अगर हर आदमी में हो, तो सच में संसार से भ्रष्ट व्यवस्था खुद ही समाप्त हो जायेगी. लेकिन मुङो लगता है कि संभवत: हेंब्रम जी भी भ्रष्टाचार की तह में नहीं गये होंगे. तभी तो उनके मन में ऐसा विचार आया. हम भली-भांति जानते हैं कि आदमी का नेचर और सिग्नेचर नहीं बदलता. उनका कथन तो बिलकुल सही है.
इसमें कोई दो राय नहीं, लेकिन आज सरकारी कर्मी से लेकर मंत्री तक को रिश्वत लेने की लत पड़ गयी है. अगर वे रिश्वत ने लें, तो रात में उन्हें नींद ही नहीं आयेगी. यह भी एक प्रकार का नशा ही है, जो छूटने का नाम नहीं ले रही है. यह छूट जाये, तो अच्छा हो.
परितोष कुमार सेन, नोनीहाट, दुमका
