फिर से बेरोजगार हो रहे हैं वे लोग

बीते दिनों राज्य के अलग-अलग हिस्सों में नगर निगम का चुनाव संपन्न हो गया. निर्वाचित प्रत्याशी कितने कारगर होंगे, इसका फैसला तो पांच साल बाद होगा, लेकिन ऐसे कई लोग हैं, जो एक और चुनाव की आस में बैठे हैं. ये वही लोग हैं, जिन्हें चुनाव रोजगार दिलाता है. कोई चुनाव के दौरान पर्चियां छाप […]

बीते दिनों राज्य के अलग-अलग हिस्सों में नगर निगम का चुनाव संपन्न हो गया. निर्वाचित प्रत्याशी कितने कारगर होंगे, इसका फैसला तो पांच साल बाद होगा, लेकिन ऐसे कई लोग हैं, जो एक और चुनाव की आस में बैठे हैं. ये वही लोग हैं, जिन्हें चुनाव रोजगार दिलाता है.
कोई चुनाव के दौरान पर्चियां छाप कर तो कोई इसे लोगों के बीच बांट कर, कोई प्रचार वाहन को संभाल कर तो कोई रैलियां निकाल कर किसी न किसी तरह कुछ पैसे कमा ले रहा था. खाद्य एवं पेय पदार्थो की अचानक बढ़ी मांग ने भी कई बेरोजगारों को इस व्यवसाय से जुड़ने का मौका उपलब्ध कराया था. महिला मंडली को भी काम मिल गया था.
अब चुनाव समाप्त हो गया, तो ये सभी फिर से बेरोजगार के शिकार हो गये. अब तो उन्हें अगले लोकसभा, विधानसभा या फिर अन्य निकाय चुनाव के आने का इंतजार है.
सौरभ कुमार सिन्हा, पोटका

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