म्यांमार के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास करके सरकार ने देश में आतंक और भय का कारोबार करनेवालों को चेता दिया है. देश के बाहरी और आंतरिक भागों से तबाही मचानेवालों को इस अभ्यास से तकलीफ हो रही है. सबके कान खड़े हो गये हैं.
सरकार ने देश के सीमावर्ती क्षेत्रों से उग्रवादियों और आतंकियों को भगाने की कार्रवाई तो शुरू कर दी है, लेकिन उसे आंतरिक भागों में पैर पसार चुके उग्रवादी और नक्सली संगठनों के खिलाफ भी इसी प्रकार की कार्रवाई करनी होगी.
अंदरूनी भागों में तबाही मचा रहे नक्सलियों को सुधारने का एकमात्र उपाय यही रह गया है कि उन्हें उनकी ही भाषा में जवाब दिया जाये. सरकारी स्तर पर इस प्रकार की कार्रवाई में देर किया जाना देश के लिए नुकसानदायक ही साबित हो सकता है. कार्रवाई के जरिये ही देश में शांति स्थापित हो सकती है.
कन्हैया प्रसाद, ई-मेल से
