झारखंड-बिहार में सडक मार्ग से सफर करते समय अधिकांश पुलों से गुजरते वक्त मंगलमय यात्र पर प्रश्न खड़ा करते हुए कुछ बोर्ड और वॉल पेंटिंग्स मिल ही जायेंगे, जो आवश्यक सूचना के रूप में लिखे होते हैं. इन दोनों राज्यों में पुलों की स्थिति बेहद दयनीय और चिंताजनक है. ज्यादातर पुलों में दरार देखे जा सकते हैं.
स्थिति ऐसी कि इन जर्जर पुलों को सीमेंट की बोरियां ही सहारा देती हैं.इन बोरियों पर टिके पुलों पर कभी भी बड़ी घटनाएं घट सकती हैं. विडंबना यह है कि विभाग से आदेश मिलने के बाद भी चोरी-छिपे रात में भारी वाहनों को भी इन पुलों से पार कराया जाता है.
दुखद यह कि इन पुलों के पास डायवर्सन बनाने की गति भी धीमी है. पुल किसी भी समाज के समाजिक-आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाता है. अत: सरकार से आग्रह है कि वह इस दिशा में कारगर कदम उठाये.
सुधीर कुमार, राजाभीठा, गोड्डा
