देश में कोई भी अपराध होने पर पीड़ित को केवल न्याय व्यवस्था से ही न्याय मिलने की उम्मीद होती है, परंतु यदि आरोपी वीआइपी से संबंध रखता हो, तो कानून भी उसके लिए बदल दिये जाते हैं. निचली अदालत से सजा मिलने पर भी हाइकोर्ट से इन्हें आसानी से जमानत मिल जाती है. अपराध चाहे जिस किसी भी श्रेणी का हो. हाल में सलमान खान और जयललिता का मुद्दा और ऐसे अनेक हाई प्रोफाइल मामले हैं, जिनमें दोषियों को जमानत पे रिहा कर दिया गया.
कई हाइ प्रोफाइल मामले तो सामने आये ही नहीं और जो आये हैं, उनमें भी सालों इंतज़ार के बाद भी पीड़ित को निष्पक्ष न्याय नहीं मिला. सवाल यह भी पैदा होता है कि क्या वीआइपी के लिए इस देश में अलग कानून है? यह देख कर दु:ख होता है कि वीआइपी को कानूनी संरक्षण मिलता है और गरीबों को जेल की सजा.
नवनीत कौर सामरा, बेरमो, बोकारो
