इंफॉरमेशन टेक्नॉलॉजी के इस जमाने में नित-नये ऐसे आविष्कार हो रहे हैं, जो हमारी जिंदगी को तेज और आरामदायक बनाते हैं. लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि इससे न सिर्फ शारीरिक और मानसिक विकृतियां पैदा होती हैं, बल्कि यह हमें पंगु भी बनाता है.
कुछ ऐसा ही हाल मोबाइल फोन का है, जो अब हर किसी के हाथ में दिख जाता है. इस पर हमारे सारे जान-पहचान वाले और रिश्तेदार बस एक ‘टच’ की दूरी पर होते हैं.
जब चाहा, घंटी बजायी और बात कर ली. लेकिन मोबाइल और उसके टावर से निकलने वाले रेडिएशन से हम कई बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं. यह इनसानों में कैंसर, चिड़चिड़ापन, तनाव की वजह बनता है तो गोरैया और मधुमक्खियों जैसे छोटे जीव इसकी वजह से विलुप्ति की कगार पर हैं. ‘अति सर्वत्र वजर्येत’ का सिद्धांत यहां भी लागू होता है.
जीतेश झा, चक्रधरपुर
