विचारों से संवेदनशील होंगे हमारे कर्म

वर्तमान में देश भर में महिला सुरक्षा खतरे में दिख रही है. घर हो या बाहर, कहीं कोई महिला सुरक्षित नहीं कही जा सकती. दरअसल, यौन हिंसा जैसे अपराध हमारे समाज में हमारे बीच के ही लोगों द्वारा अंजाम दिये जाते हैं. इसके खिलाफ देश में समय-समय पर कड़े से कड़े कानून बनाने की मांग […]

वर्तमान में देश भर में महिला सुरक्षा खतरे में दिख रही है. घर हो या बाहर, कहीं कोई महिला सुरक्षित नहीं कही जा सकती. दरअसल, यौन हिंसा जैसे अपराध हमारे समाज में हमारे बीच के ही लोगों द्वारा अंजाम दिये जाते हैं.
इसके खिलाफ देश में समय-समय पर कड़े से कड़े कानून बनाने की मांग उठती रही है. अगर एक पल के लिए मान भी लें कि कड़े कानून बनाये जाने चाहिए, लेकिन क्या इससे अपराध और दुष्कर्मियों पर पूरी तरह से अंकुश लग सकेगा? नहीं.
जरूरत है हमें अपने विचार बदलने की, अपनी सोच को आगे ले जाने की, महिलाओं के प्रति संवेदनशील विचार ही उन्हें सम्मान प्रदान करायेगा. इसके अलावा, दुष्कर्मी का सामाजिक बहिष्कार भी असरदार रहेगा. इसके साथ ही, हमें अपने घर में महिला सदस्यों को सम्मान देना होगा, तभी समाज महिलाओं के प्रति संवेदनशील होगा.
अनंत कु सिंह, गोमो

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