फिल्मी अश्‍लीलता पर लगाम लगे

दिन पर दिन बॉलीवुड में ईलता का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है. क्या देश की सरकार को यह नजर नहीं आती है? कभी घर-परिवार के साथ देखी जानेवाली बॉलीवुड की फिल्मों में इन दिनों कोई भी फिल्म ऐसी नहीं बनती, जिन्हें परिवार के सभी लोग साथ बैठकर देख सकें. यहां तक कि पारिवारिक कही […]

दिन पर दिन बॉलीवुड में ईलता का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है. क्या देश की सरकार को यह नजर नहीं आती है? कभी घर-परिवार के साथ देखी जानेवाली बॉलीवुड की फिल्मों में इन दिनों कोई भी फिल्म ऐसी नहीं बनती, जिन्हें परिवार के सभी लोग साथ बैठकर देख सकें. यहां तक कि पारिवारिक कही जानेवाली फिल्मों में भी एकाध चुंबन दृश्य ऐसे जरूर डाल दिये जाते हैं,
जिन्हें देख कर कोई भी असहज हो सकता है. समस्या तो यह है कि सरकार भी इस बारे में कुछ कहती-करती नजर नहीं आती. उसकी नाक के नीचे यह सब खेल लंबे समय से खेला जा रहा है और वह मूकदर्शक बनी बैठी है.
ऐसी ईलता से परिणामस्वरूप युवाओं के दिलोदिमाग में समाज और संबंधों के प्रति दुराग्रह पनप रहा है और यौन हिंसा के मामलों में भी बढ़ोतरी होती दिख रही है. सरकार इस दिशा में कड़े कदम उठाये.
सुमंत झा, रांची

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >