कितनी अजीब बात है कि उन्नत होते आज के समाज में भी दहेज का दानव अब भी विद्यमान है. इसकी वजह से किसी बेटी के जन्म के साथ माता-पिता चिंता की गहराइयों में डूब जाते हैं.
दहेज के दानव ने समाज के हर वर्ग और हर घर को भयभीत कर रखा है. समय बदला, लोग बदले, लेकिन दहेज नहीं बदला. बल्कि यह कहना ज्यादा सही होगा कि दहेज का दानव समय के साथ और विकराल होता जा रहा है. समाज में कई लोगों के लिए यह स्टेटस सिंबल बन चुका है.
चाहे आइएएस हो या डॉक्टर, इंजीनियर हो या चार्टर्ड अकाउंटैंट, अलग-अलग वर्ग के पेशेवर दूल्हें के लिए एक अघोषित ‘रेट चार्ट’ तैयार रहता है. अजीब बात यह है कि इस चार्ट के अनुरूप दहेज लेने और देनेवाले पक्ष अपना सीना चौड़ा करके जान-पहचानवालों को बताते हैं कि उन्होंने बेटे-बेटी की शादी कितने लाख या करोड़ में तय की है.
गणपति महतो, चास, बोकारो
