हम भारतीय डॉक्टर को भगवान का रूप मानते हैं लेकिन इस भौतिकवादी युग में पैसे की अंधी चाहत ने कई चिकित्सकों को अपने पथ से भटका दिया है. यूं तो देश की आबादी दिनोदिन बढ़ रही है, लेकिन चिकित्सा सुविधाओं का विकास उस तेजी से नहीं हो रहा है.
आमतौर पर यह देखा जाता है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज में डॉक्टरी लापरवाही की वजह से मरीज निजी अस्पतालों में जाने को मजबूर हैं. यह भी देखा जाता है कि गांव-कस्बों में डॉक्टर अपने यहां आनेवाले मरीजों को शहर के अन्य अस्पतालों के लिए रेफर कर देते हैं.
लेकिन पैसे की तंगी के कारण गरीब आदमी इलाज के लिए वहां नहीं जा सकता और उसकी जान पर बन आती है. दुख इस बात का है कि मरीज विश्वास के साथ डॉक्टर के पास आते हैं, लेकिन नर्सिग होम में उनके साथ विश्वासघात ही किया जाता है.
संग्राम मुमरू, पूर्वी सिंहभूम
