आजकल सड़कों पर कई नयी गाड़ियां उतर आयी हैं. एक से बढ़कर एक मॉडल और एक दूसरे को पछाड़ती रफ्तार इनकी खूबी है. लेकिन पता नहीं इन्हें किस बात की जल्दी होती है. इनकी इस अनियंत्रित रफ्तार पर पुलिसवालों का भी जोर नहीं चलता.
कहीं कोई रोक-टोक नहीं. इन गाड़ियों को चलानेवाले कम उम्र के युवा और अधिकांश किशोर होते हैं, जिनमें से कई के पास लाइसेंस तक नहीं होता.
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हम किसी दुर्घटना का इंतजार करते हैं? शायद हां! तभी तो सब कुछ चुपचाप चलता रहता है और जब कोई दुर्घटना होती है तो हम दुख जताते हैं. ऐसे में हम सबको जागने की जरूरत है. हम चाहें तो दुर्घटना को घटने से पहले रोक सकते हैं. अगर हर शहर, गली और मोहल्ले में लोग जागरूक व एकजुट हों, तो तेज रफ्तार वाहनों पर लगाम लगायी जा सकती है.
नीलेश कु गुप्ता, जमशेदपुर
